कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) के पुरुष जैवलिन थ्रो (Javelin Throw) फाइनल में श्रीलंका के युवा एथलीट रुमेश थरंगा पथिरागे (Rumesh Tharanga Pathirage) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। 23 वर्षीय खिलाड़ी ने 89.75 मीटर का बेहतरीन थ्रो फेंककर सभी को चौंका दिया। वहीं, भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक (Silver Medal) जीता।
नीरज चोपड़ा से भारत को गोल्ड मेडल की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन रुमेश थरंगा ने अपने शानदार प्रदर्शन से मुकाबले का परिणाम बदल दिया। इस सीजन में 92.62 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) दर्ज करने वाले रुमेश अब दुनिया के उभरते हुए सबसे खतरनाक जैवलिन थ्रो खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं।
कौन हैं रुमेश थरंगा पथिरागे?
रुमेश थरंगा पथिरागे का जन्म 21 मार्च 2003 को श्रीलंका के कलूतारा में हुआ था। आज वह भले ही विश्व स्तर के जैवलिन थ्रो खिलाड़ी हैं, लेकिन उनके खेल करियर की शुरुआत एथलेटिक्स से नहीं बल्कि क्रिकेट से हुई थी। बचपन में उनका सपना तेज गेंदबाज बनने का था और उन्हें श्रीलंका क्रिकेट का भविष्य माना जाता था।
उन्होंने 2012 में क्रिकेट खेलना शुरू किया और कोलंबो के सेंट पीटर्स कॉलेज का प्रतिनिधित्व किया। रुमेश लगातार 130 किमी/घंटा से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी करते थे। अंडर-18 स्तर पर उनकी गेंद की अधिकतम गति 134 किमी/घंटा दर्ज की गई थी, जिसने कई क्रिकेट विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।
क्रिकेट छोड़कर चुना जैवलिन थ्रो
रुमेश के जीवन में बड़ा मोड़ तब आया जब उनके पिता ने उन्हें एथलेटिक्स अपनाने की सलाह दी। उनके पिता स्वयं पूर्व एथलीट रहे हैं और डिस्कस थ्रो तथा शॉट पुट प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते थे। वर्ष 2017 में उनके कोच टोनी प्रसन्ना ने उनकी शारीरिक क्षमता, मजबूत कंधों और तेज गेंदबाजी की ताकत को देखते हुए उन्हें जैवलिन थ्रो अपनाने की सलाह दी।
रुमेश ने अपने कोच के मार्गदर्शन में तकनीक पर लगातार मेहनत की और कुछ ही वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। उनकी मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देखने को मिला, जहां उन्होंने नीरज चोपड़ा, पाकिस्तान के अरशद नदीम और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के केशोरन वालकॉट जैसे दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़कर स्वर्ण पदक जीत लिया।
श्रीलंका के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि
रुमेश थरंगा का यह गोल्ड मेडल केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि श्रीलंका के खेल इतिहास का भी महत्वपूर्ण अध्याय बन गया है। उनके स्वर्ण पदक के साथ श्रीलंका ने 20 वर्षों बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता है। इससे पहले श्रीलंका ने वर्ष 2006 में स्वर्ण पदक हासिल किया था।
इतना ही नहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में यह श्रीलंका का सिर्फ पांचवां स्वर्ण पदक है। एथलेटिक्स की बात करें तो 1950 के बाद पहली बार श्रीलंका ने कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स स्पर्धा में गोल्ड जीतकर नया इतिहास रच दिया।
भविष्य के बड़े स्टार बने रुमेश
महज 23 साल की उम्र में रुमेश थरंगा ने साबित कर दिया है कि वह आने वाले वर्षों में विश्व एथलेटिक्स के सबसे बड़े नामों में शामिल हो सकते हैं। उनकी ताकत, तकनीक और लगातार बेहतर होता प्रदर्शन उन्हें ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप और डायमंड लीग जैसी प्रतियोगिताओं में भी पदक का मजबूत दावेदार बनाता है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में नीरज चोपड़ा को हराकर गोल्ड जीतने के बाद रुमेश थरंगा पथिरागे अब वैश्विक एथलेटिक्स जगत के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं और श्रीलंका के नए खेल नायक के रूप में उभरकर सामने आए हैं।