यदि आपने किसी अंडर-कंस्ट्रक्शन आवासीय परियोजना में फ्लैट बुक कराया है और अपने सपनों के आशियाने के पजेशन का इंतजार कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। केंद्र सरकार ने देशभर के रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के तहत पंजीकृत पात्र हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए बिल्डरों को 4 महीने तक का अतिरिक्त समय (Extension) देने की राज्यों को सिफारिश की है। इस फैसले से जहां एक ओर डेवलपर्स को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर लाखों घर खरीदारों के पजेशन की समयसीमा कुछ महीनों के लिए आगे खिसक सकती है।
सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में आए व्यवधान के कारण निर्माण सामग्री की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इस्पात, सीमेंट, एल्युमीनियम और तांबे जैसे आवश्यक कच्चे माल की किल्लत और बढ़ी हुई माल ढुलाई लागत को देखते हुए इसे 'असाधारण परिस्थिति' माना गया है। यह छूट मुख्य रूप से उन रेरा-रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स पर लागू होगी जिनकी मूल या पूर्व-विस्तारित डेडलाइन 28 फरवरी 2026 या उसके बाद समाप्त हो रही है। इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए बिल्डरों को अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि राज्य रेरा प्राधिकरण एकमुश्त सार्वभौमिक आदेश जारी कर सकेंगे।
इस निर्णय का सीधा असर घर खरीदारों पर पड़ेगा, जिन्हें अब नए घर की चाबी मिलने में कुछ महीनों का इंतजार करना होगा। इसके चलते लोगों की होम लोन की ईएमआई, किराए के मकान की समयसीमा और शिफ्टिंग से जुड़ी वित्तीय योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण सामग्री की बढ़ती लागत और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच इस राहत से अधूरे प्रोजेक्ट्स के बीच में अटकने का जोखिम कम होगा और निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा हो सकेगा।