डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट बनाकर कमाई करने वाले सोशल मीडिया क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स के लिए आयकर विभाग ने महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना ऑडिट वाले व्यावसायिक या पेशेवर करदाताओं (Non-Audit Business/Professional Income) हेतु आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है। यूट्यूब एडसेंस, इंस्टाग्राम स्पॉन्सरशिप, ब्रांड कोलैबोरेशन, एफिलिएट लिंक कमीशन और सुपरचैट जैसी माध्यमों से लगातार होने वाली आय को कानूनन 'व्यवसाय या पेशे से लाभ' श्रेणी में रखा जाता है।
आयकर नियमावली के अनुसार, मौद्रिक भुगतान के अलावा ब्रांड्स द्वारा उपहार में दिए जाने वाले महंगे स्मार्टफोन, इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स या स्पॉन्सर्ड लग्जरी ट्रिप्स भी धारा 28(iv) के तहत कर योग्य आय का हिस्सा बनते हैं, जिन पर 194R के तहत TDS काटा जाता है। जो क्रिएटर्स नियमित रूप से सेवाएं दे रहे हैं, वे ITR-3 फॉर्म के जरिए अपने वास्तविक खर्चों (जैसे शूटिंग उपकरण, इंटरनेट, एडिटर्स की फीस) का दावा कर सकते हैं या ITR-4 में धारा 44AD/44ADA के तहत अनुमानित कर प्रणाली (Presumptive Taxation) का विकल्प चुन सकते हैं।
31 अगस्त की समय-सीमा चूकने वाले क्रिएटर्स को धारा 234F के तहत ₹5,000 तक की लेट फीस और बकाया कर राशि पर मासिक ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है। कर विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी डिजिटल लेन-देन, वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और 26AS का मिलान समय रहते पूरा कर सही ITR फॉर्म में रिटर्न जमा करें, ताकि बाद में स्क्रूटनी नोटिस से बचा जा सके।