नयी दिल्ली: वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) द्वारा आयोजित दो दिवसीय 'सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सम्मेलन-2026' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक इस समय अगले दौर के वित्तीय सुधारों को लागू करने के लिए बेहद मजबूत स्थिति में हैं, क्योंकि बैंकों की फंसी हुई परिसंपत्तियां (एनपीए) ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर आ चुकी हैं। इसी आधार को मजबूत बनाते हुए 'विकसित भारत' के लक्ष्यों के अनुरूप बैंकिंग क्षेत्र को ढालने के लिए जल्द ही एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा।
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में देश की 15 से 29 वर्ष की 29 प्रतिशत युवा आबादी का जिक्र करते हुए 'युवाओं के लिए बैंकिंग' को भविष्य की मुख्य प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच 'मेरा युवा भारत' (MY Bharat) के माध्यम से करोड़ों युवाओं को औपचारिक वित्तीय प्रणाली, शिक्षा ऋण और उद्यमिता से जोड़ा जा सकता है। सम्मेलन के पहले दिन जमा राशि बढ़ाने, निवेश चक्र को गति देने और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव संजय लोहिया सहित विभिन्न आर्थिक विशेषज्ञों ने भाग लिया और सार्वजनिक बैंकों को भावी आर्थिक विकास का आधार स्तंभ बनाने के रणनीतिक उपायों पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए।