बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश के धार्मिक नगर वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। मंगलवार को जलस्तर 66.64 मीटर दर्ज किया गया, जिसके चलते वाराणसी के प्रसिद्ध 84 घाटों का आपसी संपर्क पूरी तरह टूट गया है। कई घाटों के स्नान स्थल और सीढ़ियां पानी में डूब चुके हैं, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जलस्तर बढ़ने का बड़ा असर अंतिम संस्कार और प्रसिद्ध गंगा आरती पर भी पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पानी भर जाने से अब सीढ़ियों पर ही अंतिम संस्कार किया जा रहा है। वहीं, दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली दैनिक आरती का स्थान बदलकर इसे छत पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसके अलावा, नमो घाट के प्लेटफॉर्म तक भी पानी पहुंच चुका है, जिसे देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है।
गंगा में आ रहे उफान से वरुणा नदी में पलट प्रवाह (Reverse Flow) शुरू हो गया है, जिससे तटीय इलाकों के एक दर्जन से अधिक मोहल्लों में जलभराव का खतरा पैदा हो गया है। इससे स्थानीय बुनकरों के 2000 से अधिक पावरलूम और हथकरघों के प्रभावित होने तथा लगभग 1000 परिवारों के विस्थापन की आशंका जताई जा रही है। पिछले 24 घंटों में 46.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है और मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर और बढ़ने की संभावना जताई है।
बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने गंगा में नाव संचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है। सुरक्षा के मद्देनजर एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस की टीमें घाटों पर लगातार गश्त कर रही हैं। सावन के महीने में कांवरियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए नदी में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और तटीय इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।