भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की शानदार जीडीपी विकास दर दर्ज की है। इस बड़ी आर्थिक सफलता पर देशवासियों को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भरता और स्वदेशी के संकल्प को मजबूत करने का आह्वान किया है। अपने हालिया वीडियो संदेश में उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया है कि जब तक अत्यंत आवश्यक न हो, सोने की खरीद से परहेज करें। इस कदम के पीछे देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को नियंत्रित करना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) को मजबूती देना प्रमुख उद्देश्य है।
भारत अपनी घरेलू सोने की मांग का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, जिसके भुगतान के लिए भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा (डॉलर) खर्च होती है। वैश्विक अनिश्चितताओं, मध्य पूर्व के तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण देश का व्यापार संतुलन पहले से ही दबाव में है। ऐसे में अनावश्यक सोने की मांग विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त बोझ डालती है। सरकार का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर सोने का आयात घटता है, तो रुपये की विनिमय दर में सुधार होगा और आयातित मुद्रास्फीति (Imported Inflation) को रोकने में मदद मिलेगी।
यह अपील केवल व्यक्तिगत बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि 'विकसित भारत @2047' के व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार घरेलू पूंजी को निष्क्रिय परिसंपत्तियों में अटकाने के बजाय विनिर्माण और उद्यमशीलता जैसे उत्पादक क्षेत्रों में लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि उपभोक्ता व्यवहार में यह बदलाव दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती और व्यापक व्यापार घाटे को कम करने में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।