महिला सशक्तिकरण पर आधारित फिल्म 'तीसरी बेगम' एक बार फिर चर्चा में है। फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता के.सी. बोकाडिया ने खुलासा किया है कि इस फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुंचाने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। सेंसर बोर्ड के साथ लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा, जहां फिल्म देखने के बाद अदालत ने इसकी रिलीज़ का रास्ता साफ किया। बोकाडिया का कहना है कि यह संघर्ष इसलिए मायने रखता है क्योंकि फिल्म एक ऐसा संदेश देती है, जिसे हर परिवार तक पहुंचना चाहिए।
बोकाडिया ने बताया कि फिल्म तैयार होने के बाद सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान कई अड़चनें सामने आईं। रिवाइजिंग कमेटी से भी राहत नहीं मिलने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आखिरकार हाई कोर्ट के जज ने फिल्म देखी और उसके बाद थिएटर रिलीज़ की मंजूरी मिली। निर्देशक के मुताबिक, तमाम मुश्किलों के बावजूद सिनेमाघरों में दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला और कई जगह शो हाउसफुल रहे। हालांकि, थिएटर की एक्सक्लूसिव रिलीज़ विंडो के कारण फिल्म की OTT रिलीज़ कुछ समय के लिए टालनी पड़ी, जो अब 18 जुलाई को होने जा रही है।
निर्देशक का मानना है कि 'तीसरी बेगम' सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज के लिए एक जरूरी संदेश है। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि भारत का हर परिवार और खास तौर पर हर महिला इस फिल्म को देखे। उनके अनुसार, यह कहानी महिलाओं को मुश्किल हालात में भी हार न मानने, अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। जयपुर, ब्यावर और कई शहरों में हुई स्क्रीनिंग के दौरान महिला दर्शकों ने फिल्म से गहरा जुड़ाव महसूस किया और इसकी कहानी की खुलकर सराहना की।
फिल्म की कहानी भी काफी दिलचस्प है। बोकाडिया ने बताया कि यह एक वास्तविक घटना से प्रेरित है, जिसे उन्होंने खुद करीब से देखा था। कहानी एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे शादी के बाद पता चलता है कि उसके पति की पहले से दो पत्नियां हैं। लेकिन यह कहानी सिर्फ धोखे की नहीं, बल्कि तीन महिलाओं की एकजुटता, साहस और आत्मसम्मान की भी है, जो मिलकर अपनी नई पहचान और आजादी की लड़ाई लड़ती हैं। निर्देशक ने यह भी साफ किया कि फिल्म का किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कोई एजेंडा नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सिर्फ एक सामाजिक सच को संवेदनशील तरीके से सामने लाना है।
'तीसरी बेगम' को के.सी. बोकाडिया ने लिखा, निर्देशित और प्रोड्यूस किया है। फिल्म में कायनात अरोड़ा, मुग्धा गोडसे, रचना श्याम, सुप्रिया कार्निक और ज़रीना वहाब अहम भूमिकाओं में नजर आएंगी। महिला प्रधान विषय, भावनात्मक कहानी और मजबूत संदेश के साथ यह फिल्म दर्शकों के बीच नई चर्चा छेड़ने के लिए तैयार है। अब देखना दिलचस्प होगा कि OTT पर रिलीज़ के बाद यह फिल्म कितने बड़े दर्शक वर्ग तक अपनी बात पहुंचा पाती है।