मद्रास उच्च न्यायालय का बड़ा फैसला: पूर्व मंत्री ईवी वेलु के लुकआउट सर्कुलर पर रोक, 15 जुलाई को जांच अधिकारी के सामने होंगे पेश
चेन्नई: तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों और न्यायिक लॉजिस्टिक्स के बीच एक बेहद कड़ा और विखंडनकारी घटनाक्रम सामने आया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के कद्दावर नेता और राज्य के पूर्व मंत्री ईवी वेलु के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) पर गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से रोक लगा दी है। न्यायालय के इस विलेख के तहत न्यायमूर्ति जी के इलंथिराययन ने सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे आगामी 28 जुलाई तक पूर्व मंत्री के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या सख्त प्रशासनिक कदम न उठाएं। इसके साथ ही, अदालत ने जांच एजेंसी को वेलु द्वारा प्राथमिकी (FIR) और लुकआउट सर्कुलर को पूरी तरह रद्द करने की मांग वाली याचिका पर अपना सांख्यिकी जवाब दाखिल करने के लिए नियम तय किए हैं।
न्यायालय ने इस राहत के लिए एक कड़क विधिक शर्त भी जोड़ी है, जिसके नियमों के अनुसार ईवी वेलु को आगामी 15 जुलाई को पूछताछ के लिए जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। पूर्व मंत्री के वकील और राज्यसभा सदस्य पी विल्सन ने इस कूटनीतिक जीत की पुष्टि करते हुए मीडिया इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया कि एजेंसी अपनी जांच को आगे बढ़ा सकती है, लेकिन न्यायालय के अगले आदेश तक मामले की अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाएगी।
यह पूरा मामला वर्ष 2022 का है, जब गैर-सरकारी संगठन (NGO) 'अराप्पोर इयक्कम' की शिकायत और राज्य सरकार के नियमों के तहत मिली मंजूरी के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत यह प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सतर्कता विभाग का सांख्यिकी दावा है कि सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का काम शुरू होने से पहले ही एक चुनिंदा ठेकेदार को प्रोजेक्ट फंड का कूटनीतिक भुगतान कर दिया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। वर्तमान में चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर गए वेलु के खिलाफ इसी सुरक्षा कवच के तहत लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था, जिसके पुराने विवादों पर अब अदालत ने अस्थायी रोक लगा दी है।