मैरी कॉम का नाम भारतीय बॉक्सिंग में सिर्फ एक चैंपियन के तौर पर नहीं, बल्कि जिद, मेहनत और हिम्मत की मिसाल के रूप में लिया जाता है। हालही में रोहेद खान के साथ लाइव बातचीत में उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय लेने की कोशिश करने वाले लोगों पर खुलकर बात की। मैरी के मुताबिक, कुछ लोग आज यह कहने से पीछे नहीं हटते कि उन्होंने उन्हें बनाया है, लेकिन असल सफर में उनके साथ कौन खड़ा था और मुश्किल वक्त किसनेझेला, यह बात वह अच्छी तरह जानती हैं।
मैरी ने अपनी बात रखते हुए उन दावों पर नाराजगी जताई जिनमें दूसरे लोग उनकी कामयाबी में अपना बड़ा योगदान बताते हैं। उनका सवाल सीधा था—क्या वे लोग कभी बॉक्सिंग रिंग में उनके साथ उतरे थे? क्या उन्होंने उनकी चोटें झेली थीं? क्या उन्होंने घंटों की कठिन ट्रेनिंग, थकान और लगातारखुद को बेहतर बनाने की कोशिश को महसूस किया था? मैरी की नजर में चैंपियन बनना किसी एक व्यक्ति की मदद से रातोंरात हासिल होने वालीचीज नहीं थी। इसके पीछे वर्षों की मेहनत और ऐसे कई त्याग थे, जिन्हें सिर्फ वही समझ सकती हैं जिन्होंने उन्हें जिया है।
किसी खिलाड़ी की चमकती ट्रॉफियां और मेडल देखकर उसकी कहानी आसान लग सकती है, लेकिन उस चमक के पीछे का पसीना अक्सर नजर नहींआता। मैरी कॉम के करियर में भी जीत के साथ चोट, असफलता, दबाव और वापसी के कई पड़ाव रहे हैं। हर कठिन ट्रेनिंग सेशन और हर मुश्किल दौरने उन्हें आगे बढ़ाया। ऐसे में जब कोई बाद में उनकी पूरी यात्रा का श्रेय अपने नाम करने की कोशिश करता है, तो यह स्वाभाविक तौर पर उन्हें खटकताहै। मैरी की बातों में यही दर्द और गुस्सा साफ सुनाई दिया कि उनकी कहानी को वही लोग पूरी तरह समझ सकते हैं जिन्होंने उस संघर्ष को करीब सेदेखा है।
बातचीत के दौरान रोहेद खान ने भी एक दिलचस्प पहलू सामने रखा कि कई बार किसी की चुप्पी को लोग गलत तरीके से समझ लेते हैं। किसीव्यक्ति का हर बात पर जवाब न देना यह साबित नहीं करता कि उसे कुछ पता नहीं है या वह कमजोर है। कई बार चुप रहना भी अपने आप में एकताकत होती है। शायद यही वजह है कि मैरी ने भी हर दावे या हर टिप्पणी का जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत और उपलब्धियों को बोलने दिया है।आखिरकार, रिंग में मिली जीत किसी बयान से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से तय होती है।
मैरी कॉम की पूरी यात्रा इसी आत्मविश्वास और जुझारूपन की कहानी रही है। उन्होंने जिस मुकाम तक पहुंचने के लिए सालों पसीना बहाया, वहांपहुंचने के बाद अपनी कहानी का श्रेय किसी और को सौंप देना उनके लिए आसान नहीं हो सकता। उनकी हालिया बातचीत ने एक बार फिर यहसवाल खड़ा किया कि किसी सफल इंसान की कहानी में मदद करने वालों की भूमिका अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उसके संघर्ष और त्याग कोनजरअंदाज करके पूरी सफलता का मालिक बन जाना अलग बात है। मैरी का संदेश साफ है—लोग अपनी बातें कह सकते हैं, लेकिन रिंग में उतरकरलड़ाई उन्होंने खुद लड़ी है।