अजय देवगन का नाम बॉलीवुड के उन सितारों में आता है जिन्हें किसी पहचान की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग है। टीवी के लोकप्रिय क्राइम शो ‘क्राइम पेट्रोल’ के साथ उनका नया सफर शुरू हुआ और उम्मीद थी कि उनकी गंभीर स्क्रीन प्रेजेंस शो को एक नया रंग देगी। मगर पहला एपिसोड आते ही सोशल मीडिया पर तारीफ से ज्यादा आलोचना की आवाजें सुनाई देने लगीं। जिस डेब्यू को दमदार एंट्री माना जा रहा था, वह देखते ही देखते मीम्स और सवालों का विषय बन गया।
दरअसल, फिल्म और टीवी की दुनिया में कैमरे के सामने काम करने का तरीका काफी अलग होता है। फिल्मों में कलाकारों को टेक, रीटेक और सीन की तैयारी के लिए समय मिल सकता है, जबकि टीवी के क्राइम शो में रफ्तार काफी तेज रहती है। कलाकारों को लंबे संवाद, गंभीर नैरेशन और लगातार बदलते दृश्यों के बीच तुरंत पकड़ बनानी होती है। देवगन के पहले एपिसोड को लेकर कई दर्शकों को लगा कि उनकी प्रस्तुति टीवी के इसफॉर्मेट के साथ पूरी तरह सहज नहीं बैठी। नतीजा यह हुआ कि अभिनेता की स्टार इमेज और शो की स्थापित शैली के बीच तालमेल पर बहस शुरू होगई।
इस आलोचना को एक वायरल वीडियो ने और हवा दे दी। एक वरिष्ठ पत्रकार ने देवगन की तैयारी और टेलीप्रॉम्प्टर पर उनकी निर्भरता को लेकर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर इसके बाद तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कुछ यूजर्स ने उनके हिस्से की एडिटिंग और शूटिंग स्टाइल कोलेकर भी अनुमान लगाए, यहां तक कि ग्रीन स्क्रीन और अलग सेटअप की बातें भी सामने आईं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिनइंटरनेट पर एक बार चर्चा शुरू हो जाए तो उसे रोकना मुश्किल ही होता है।
दिलचस्प बात यह है कि आलोचना सिर्फ आम दर्शकों तक सीमित नहीं रही। टीवी इंडस्ट्री से जुड़े कुछ कलाकारों ने भी फिल्म और टेलीविजन के काम करने के तरीके में अंतर की ओर इशारा किया। अभिनेत्री मलिका आर. घई ने बताया कि टीवी कलाकारों को अक्सर कम तैयारी के समय में तेज गतिसे कई दृश्यों पर काम करना पड़ता है। वहीं भाविका ने शुरुआती केस को निराशाजनक बताते हुए देवगन की आवाज और नैरेशन की तीव्रता पर सवालउठाए। उन्होंने अनूप सोनी को शो का असली चेहरा तक बताया। यानी बहस अब सिर्फ ‘अच्छा लगा या बुरा’ से निकलकर इस सवाल तक पहुंच गईकि क्या शो के लिए सही होस्टिंग स्टाइल चुना गया था।
यहीं अजय देवगन की तुलना अनूप सोनी से होना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती है। सोनी ने लंबे समय तक अपने शांत, गंभीर और भरोसेमंद अंदाज से ‘क्राइम पेट्रोल’ की पहचान मजबूत की थी। दर्शकों को उनकी आवाज और कहानी कहने का तरीका शो के फॉर्मेट का हिस्सा लगने लगाथा। ऐसे में किसी बड़े फिल्म स्टार का उसी जगह आना अपने आप में बड़ा प्रयोग था। लेकिन अगर नया चेहरा दर्शकों को स्वाभाविक नहीं लगता, तोस्टारडम भी उस दूरी को तुरंत खत्म नहीं कर सकता। यही वजह है कि देवगन का टीवी प्रयोग फिलहाल उनके पक्ष में जाता हुआ नजर नहीं आ रहा।
और अब कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा ‘दृश्यम 3’ से जुड़ता है। देवगन की अगली बड़ी फिल्मों में से एक को लेकर पहले से ही दर्शकों की उम्मीदें काफी ऊंची हैं। ऐसे समय में ‘क्राइम पेट्रोल’ जैसा बड़ा टीवी प्लेटफॉर्म उनके लिए दर्शकों के बीच फिर से मजबूत कनेक्शन बनाने का मौका हो सकताथा। लेकिन डेब्यू के बाद चर्चा फिल्म से ज्यादा उनकी टीवी प्रस्तुति पर हो रही है। एक खराब एपिसोड किसी अभिनेता का करियर तय नहीं करता, यहबात बिल्कुल सही है। मगर जब सोशल मीडिया पर दर्शक, टीवी कलाकार और इंडस्ट्री से जुड़े लोग एक साथ सवाल उठाने लगें, तो उस प्रतिक्रिया को नजर-अंदाज करना भी समझदारी नहीं होगी। अब असली परीक्षा पर्दे पर होगी—क्या ‘दृश्यम 3’ देवगन को वह दमदार जवाब देने का मौका देती है, जिसकी फिलहाल उनके आलोचक तलाश कर रहे हैं?
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