बनारस न्यूज डेस्क: बच्चों के यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज होने के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर हलचल तेज हो गई है। प्रयागराज पुलिस पिछले तीन दिनों से वाराणसी में मौजूद है, हालांकि अभी तक आश्रम पहुंचकर औपचारिक पूछताछ नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस पहले साक्ष्य जुटाने और कानूनी तैयारी पूरी करने में लगी है, क्योंकि मामला बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल है।
बताया जा रहा है कि जांच एजेंसी पूरी रणनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है, ताकि पूछताछ के दौरान कोई कानूनी चूक न हो। पुलिस का मानना है कि पर्याप्त सबूत और दस्तावेजी आधार मजबूत होने के बाद ही शंकराचार्य या उनके शिष्यों से सीधे सवाल-जवाब किए जाएंगे। कोर्ट के आदेश पर झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसमें शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
इस बीच शंकराचार्य ने मीडिया से बातचीत में खुद पर लगे आरोपों को साजिश बताया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व को उन लोगों से खतरा है जो दिखावे के लिए खुद को हिंदू बताते हैं। साथ ही सवाल उठाया कि यदि और छात्रों के शोषण की बात कही जा रही है तो उन्हें सामने क्यों नहीं लाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे प्रकरण के पीछे सोची-समझी रणनीति हो सकती है। 24 फरवरी को उन्होंने प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की।
वहीं, इंडियन नेशनल कांग्रेस ने शंकराचार्य के समर्थन में प्रदेश के 75 जिलों में प्रदर्शन की घोषणा की है। यह विवाद 18 जनवरी को प्रयागराज माघ मेले के दौरान प्रशासन से हुए टकराव के बाद और गहरा गया। इसके बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट में याचिका, बच्चों के बयान और अंततः 21 फरवरी को एफआईआर दर्ज होने के साथ मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ा।