बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के चंद्रावती गांव में गंगा किनारे निर्मित भव्य तीन-स्तरीय घाट जैन धर्म के अनुयायियों और पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बनने जा रहा है। जैन धर्म के 8वें तीर्थंकर भगवान चंद्रप्रभु की जन्मस्थली पर बना यह 200 मीटर लंबा घाट अपनी आधुनिक निर्माण तकनीक और धार्मिक महत्व के कारण विशेष है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने काशी प्रवास के दौरान आज इस आधुनिक रिवर फ्रंट का लोकार्पण करेंगे, जो करीब 500 साल पुराने मंदिर को गंगा के कटाव से बचाने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल 'लो कार्बन फुटप्रिंट' तकनीक पर आधारित है।
आर्किटेक्चर के लिहाज से यह घाट आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक विरासत का अनूठा मिश्रण है। यद्यपि यह पूरी तरह नया है, लेकिन गैबियन और रिटेनिंग वॉल के प्रयोग से इसे वाराणसी के ऐतिहासिक हेरिटेज घाटों जैसा स्वरूप दिया गया है। बाढ़ की स्थिति को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस घाट पर तीन बड़े प्लेटफॉर्म, सुंदर रेलिंग, पत्थर की बेंच, और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चेंजिंग रूम व टॉयलेट ब्लॉक जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों की सुगमता के लिए एक विशाल पार्किंग क्षेत्र भी विकसित किया गया है।
धार्मिक रूप से चंद्रावती का महत्व बहुत गहरा है, क्योंकि यह स्थान भगवान चंद्रप्रभु के चार कल्याणकों—च्यवन, जन्म, दीक्षा और ज्ञान—का साक्षी रहा है। जैन ग्रंथों के अनुसार, इसी गंगा तट पर नाग वृक्ष के नीचे उन्होंने तपस्या कर केवल ज्ञान प्राप्त किया था। यहाँ दिगंबर और श्वेतांबर दोनों ही संप्रदायों के प्राचीन मंदिर स्थित हैं, जहाँ प्रतिवर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं। यह नया घाट न केवल उनकी आस्था को एक नया आधार देगा, बल्कि इस पूरे परिक्षेत्र के सांस्कृतिक वैभव को भी प्रदर्शित करेगा।
पर्यटन विभाग की भविष्य की योजनाओं में इस घाट को नमो घाट की तरह एक बड़े जल पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना शामिल है। आगामी समय में इसे क्रूज और नावों के जलमार्ग से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे मुख्य शहर से पर्यटकों का आवागमन और अधिक सुलभ हो जाएगा। आधुनिक सुविधाओं और आस्था के इस संगम से चंद्रावती अब काशी के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते सितारे की तरह उभरेगा, जिससे स्थानीय रोजगार और धार्मिक पर्यटन को अत्यधिक गति मिलने की उम्मीद है।