बनारस न्यूज डेस्क: दमकल विभाग तकनीक और उपकरणों के मामले में भले ही पहले से ज्यादा मजबूत हुआ हो, लेकिन कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। फिलहाल विभाग में कुल 155 कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि जरूरत 254 कर्मियों की है। इनमें से केवल 112 ही फायर ऑफिसर और फायर फाइटर हैं, बाकी सहायक स्टाफ है। आने वाले छह से सात महीनों में छह कर्मचारी सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे हालात और गंभीर हो सकते हैं।
विभाग के करीब 15 प्रतिशत कर्मचारी ऐसी उम्र में पहुंच चुके हैं, जहां काम तो हो सकता है लेकिन पहले जैसी फुर्ती नहीं रहती। करीब 40 लाख की आबादी वाले जिले की आग से सुरक्षा की जिम्मेदारी महज 116 सक्रिय कर्मियों पर है। स्टाफ की कमी के चलते विभाग तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाकर काम चला रहा है, लेकिन उम्रदराज कर्मियों की वजह से कई बार घटनास्थल तक पहुंचने और कार्रवाई में देरी हो जाती है। फिलहाल विभाग को कम से कम 94 नए कर्मियों की तत्काल जरूरत है, जिसे लेकर शासन से पत्राचार किया गया है।
दमकल विभाग को 24 घंटे अलर्ट मोड में रखने के लिए सभी फायर स्टेशनों पर आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्टों में ड्यूटी तय की गई है। फायर फाइटर्स को आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने और रेस्क्यू की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, विभाग को कई बार गलत सूचनाओं से भी जूझना पड़ता है। बीते एक साल में करीब 15 बार आग की झूठी सूचना मिली, जहां पहुंचने पर कोई घटना नहीं पाई गई।
संसाधनों की बात करें तो विभाग के पास दो हाई-प्रेशर मिनी टैंकर, चार टीआरबी एंबुलेंस, आठ इमरजेंसी फायर बाइक समेत कुल 36 अन्य उपकरण हैं। ऊंची इमारतों के लिए चार हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, जो 43 मीटर यानी 13 मंजिला इमारत तक पहुंच सकते हैं, साथ ही तीन फोम टेंडर भी हैं। फिलहाल शहर में 14 मंजिला से ऊंची इमारत नहीं है, लेकिन रामनगर में 112 मीटर ऊंची इमारत प्रस्तावित है, जिसे देखते हुए भविष्य में विभाग को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।