बनारस न्यूज डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच काशी में रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। त्योहारों के समय गैस सिलेंडर की कमी की खबरों से शहर के कई हिस्सों में परेशानी देखने को मिल रही है। कई बड़े होटलों में गैस की कमी के कारण अब पारंपरिक चूल्हों पर खाना बनाना शुरू कर दिया गया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें लग रही हैं। कुछ एजेंसियों में तकनीकी दिक्कत के चलते सर्वर बंद होने की बात कही जा रही है, जबकि कुछ स्थानों पर एजेंसी बंद मिलने से लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ा। वहीं शहर के कई मठ-मंदिरों में संचालित अन्नक्षेत्रों ने एहतियात के तौर पर नाश्ते में कटौती की योजना भी बनाई है।
हालांकि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन का कहना है कि मंदिर परिसर में ईंधन की कोई कमी नहीं है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार श्रद्धालुओं को पहले की तरह नियमित रूप से प्रसाद और भोजन दिया जा रहा है और इस व्यवस्था में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।
इसी तरह अन्नपूर्णा मंदिर के अन्नक्षेत्र और भदैनी स्थित मारवाड़ी सेवा संघ द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में भी रोजाना भंडारा पहले की तरह जारी है। प्रबंधन से जुड़े लोगों ने बताया कि उनके पास फिलहाल पर्याप्त सिलेंडर उपलब्ध हैं और जरूरत पड़ने पर भट्टी या इलेक्ट्रिक उपकरण जैसे वैकल्पिक साधनों का उपयोग किया जा सकता है, जिससे भोजन सेवा प्रभावित नहीं होगी।
दूसरी ओर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जानकारी के अनुसार 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है, जिसके बाद इसकी कीमत 916.50 रुपये से बढ़कर 976.50 रुपये हो गई है। वहीं 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और अब इसकी कीमत 2,065.50 रुपये हो गई है।
जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने कहा कि जिले में गैस की आपूर्ति पर्याप्त है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और अफवाहों से बचें।