बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में एलपीजी संकट का असर अब धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है। गैस सिलेंडर की कमी के कारण मां अन्नपूर्णा मंदिर की रसोई शनिवार को बंद रही। सुबह दर्शन के बाद अन्नक्षेत्र पहुंचे श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद नहीं मिल सका, जिसके कारण कई भक्त मायूस होकर बांसफाटक से लौट गए। बताया जा रहा है कि काशी में यह पहला मंदिर है जहां गैस की कमी के कारण आम श्रद्धालुओं के लिए चलने वाली रसोई को बंद करना पड़ा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार बांसफाटक स्थित अन्नपूर्णा अन्नक्षेत्र की दूसरी शाखा में ईंधन की कमी के चलते भोजन बनाना संभव नहीं हो पाया। आमतौर पर यहां प्रतिदिन 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भोजन प्रसाद कराया जाता है। काशी में यह रसोई शहर की पहली सार्वजनिक रसोई मानी जाती है, जहां वर्षों से बिना किसी भेदभाव के हजारों लोगों को भोजन कराया जाता रहा है।
रसोई बंद होने के बाद मंदिर प्रशासन ने गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। महंत शंकर पुरी के मुताबिक करीब 35 वर्षों में पहली बार ऐसा संकट आया है, जब एलपीजी की कमी के कारण अन्नक्षेत्र में भोजन सेवा रोकनी पड़ी है। प्रशासन का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त गैस उपलब्ध होगी, भोजन सेवा फिर से शुरू कर दी जाएगी।
इधर इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। अजय राय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रसोई बंद होने पर नाराजगी जताई और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि गैस संकट के कारण काशी की अन्नदान परंपरा प्रभावित हो रही है, जबकि शहर में पहले से ही होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट भी गैस की कमी से जूझ रहे हैं।