बनारस न्यूज डेस्क: भारतीय रेलवे ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे मंत्रालय ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के लिए कुल 1,334 करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन योजनाओं का मुख्य उद्देश्य ट्रेनों की लेटलतीफी को कम करना, सुरक्षा बढ़ाना और माल ढुलाई की क्षमता में सुधार करना है। इन परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश के वाराणसी रेल मंडल को विशेष प्राथमिकता मिली है, जहां वाराणसी सिटी और औड़िहार जंक्शन के बीच तीसरी रेल लाइन बिछाई जाएगी।
वाराणसी-औड़िहार रूट पर वर्तमान में दो लाइनें हैं, लेकिन ट्रेनों का दबाव इतना अधिक है कि अक्सर गाड़ियां सिग्नल पर रुकती रहती हैं। 31.36 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन 497.07 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। नई लाइन बनने के बाद इस रूट की लाइन क्षमता 87.93 प्रतिशत से बढ़कर 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी। इससे यात्री ट्रेनों के बीच में रुकने का समय घटेगा और मालगाड़ियों के कारण होने वाली देरी कम होगी।
तीसरी लाइन पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड होगी और आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम से लैस होगी। यह ट्रैक मेमू शेड और औड़िहार जंक्शन जैसी व्यस्त सुविधाओं के लिए अतिरिक्त क्षमता प्रदान करेगा। इस लाइन के बनने से वाराणसी रेल मंडल में एक नया कीर्तिमान स्थापित होगा, क्योंकि यह खंड की पहली विशेष ट्रिपलिंग परियोजना होगी। इससे यात्रियों को समय की बचत होगी और रेल मंत्रालय नई प्रीमियम, एक्सप्रेस और वंदे भारत जैसी ट्रेनें इस मार्ग पर चला सकेगा।
इस परियोजना का आर्थिक और सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण रहेगा। निर्माण के दौरान स्थानीय स्तर पर रोजगार उत्पन्न होंगे और माल ढुलाई में 1.99 मिलियन टन की अतिरिक्त क्षमता आने की संभावना है। इससे व्यापारियों को अपने सामान को तेजी से और आसानी से अन्य राज्यों तक भेजने में मदद मिलेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से वाराणसी, गाजीपुर और आसपास के जिलों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और पूरे क्षेत्र में विकास को नई दिशा मिलेगी।