बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में शुक्रवार सुबह से तेज धूप निकलने के कारण लोगों को गर्मी के साथ उमस भी परेशान कर रही है। सुबह करीब 29 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि हवा की रफ्तार करीब 6 किलोमीटर प्रति घंटे रही। वातावरण में नमी 82 फीसदी होने से धूप का असर ज्यादा महसूस हुआ। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स 65 दर्ज किया गया, जो सामान्य श्रेणी में है। मौसम वैज्ञानिक मनोज श्रीवास्तव के मुताबिक, उत्तर प्रदेश से मानसून की विदाई इस बार सामान्य से थोड़ी देर से हो सकती है और 20 सितंबर तक वाराणसी व आसपास के इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के आसार बने रहेंगे।
उधर, गंगा का जलस्तर कम होने के बाद अब घाटों पर जमा सिल्ट परेशानी का कारण बनी हुई है। करीब एक महीने तक बाढ़ के पानी में डूबे रहने के कारण अस्सी घाट से शिवाला और केदार घाट तक कई जगह मोटी परत में गाद और कीचड़ जमा हो गया है। अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस के मंच के सामने बने प्लेटफॉर्म पर करीब एक फीट तक सिल्ट जमा है। सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों में भी गाद होने से घाटों का सामान्य स्वरूप बदल गया है।
पानी घटने के साथ घाटों से जुड़े स्थानीय लोगों ने सफाई का काम खुद संभालना शुरू कर दिया है। राहुल पांडेय के मुताबिक, बाढ़ के चलते करीब एक महीने से घाटों पर गतिविधियां प्रभावित रहीं और श्रद्धालुओं व पर्यटकों की संख्या कम होने से पुरोहितों, दुकानदारों और दूसरे स्थानीय लोगों की कमाई पर भी असर पड़ा। अब पानी उतरने के बाद स्थानीय पुरोहित और दुकानदार पंप लगाकर पानी निकालने और सिल्ट हटाने में जुट गए हैं, ताकि घाटों पर धार्मिक गतिविधियां और रोजमर्रा का काम जल्द शुरू हो सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों की सफाई का काम काफी बड़ा है और कई जगह पानी व सिल्ट हटाने के लिए अतिरिक्त पंप की जरूरत है। फिलहाल लोग अपने स्तर पर पंप की व्यवस्था कर सफाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि नगर निगम की ओर से भी पंप उपलब्ध कराए जाएं तो सफाई का काम तेजी से पूरा हो सकता है। घाटों से जुड़े लोगों के मुताबिक, बाढ़ के बाद घाटों को जल्द सामान्य स्थिति में लाना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका भी फिर से पटरी पर लौट सके।