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ऑस्ट्रेलिया में किशोरों पर सोशल मीडिया बैन की कोशिशें नाकाम, उम्र की जांच में फेल हुए प्लेटफॉर्म्स

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Posted On:Wednesday, July 8, 2026


ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के किशोरों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को एक बड़ा झटका लगा है। एक नए अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, किशोरों की उम्र की जांच (Age Verification) करने के शुरुआती चरण में ही पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
अध्ययन में क्या सामने आया?
सॉफ्टवेयर टेस्टर्स की एक टीम ने पिछले एक साल में 1,000 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई लोगों पर 'एज-अश्योरेंस' (उम्र सुनिश्चित करने वाला) सॉफ्टवेयर का परीक्षण किया। अध्ययन के दौरान पाया गया कि:

  • उम्र का प्रमाण नहीं मांगा गया: परीक्षण के दौरान 50 फर्जी अकाउंट बनाए गए, जिनमें उम्र 16 साल से अधिक बताई गई थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से किसी भी अकाउंट को बनाने के दौरान किसी भी प्लेटफॉर्म ने उम्र का कोई प्रमाण (Age Proof) नहीं मांगा।
  • प्लेटफॉर्म्स की विफलता: इंस्टाग्राम (मेटा), स्नैपचैट, टिकटॉक और यूट्यूब जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर भी उम्र की कोई खास जांच नहीं हुई। केवल एक प्लेटफॉर्म 'किक' (Kick) ने बिना उम्र के प्रमाण के अकाउंट बनाने से मना किया।
  • अश्लील कंटेंट का खतरा: शोधकर्ताओं ने बताया कि एलन मस्क के प्लेटफॉर्म 'X' पर जब 16 साल की उम्र बताकर अकाउंट बनाया गया, तो उस पर अश्लील कंटेंट (pornographic content) भी दिखाया गया, जो सुरक्षा की पोल खोलता है।
सरकार और कंपनियों की स्थिति
  • सरकार का रुख: ऑस्ट्रेलिया के नए सोशल मीडिया कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के बच्चों का अकाउंट बनाना प्रतिबंधित है। सरकार ने इन प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी दी है कि वे नियमों का पालन करें, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पिछले महीने ही सरकार ने जुर्माने की राशि को दोगुना कर दिया था।
  • कंपनियों का तर्क: टेक कंपनियों का कहना है कि वे रेगुलेटर के दिशा-निर्देशों का पालन कर रही हैं, जो निजता (privacy) को देखते हुए सरकारी आईडी को ही एकमात्र प्रमाण मानने पर रोक लगाते हैं। मेटा के प्रवक्ता ने कहा कि यह परीक्षण कंपनी के सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं था।
प्रमुख बिंदु:
  • असली समस्या 'सरकमवेंशन': विशेषज्ञ मान रहे हैं कि युवा अब गलत जन्मतिथि डालकर नियमों को बड़ी आसानी से दरकिनार कर रहे हैं, और प्लेटफॉर्म्स इस 'बदमाशी' को रोकने में सक्षम नहीं हैं।
  • शुरुआती जांच का फेल होना: जो तकनीक ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर उपयोगकर्ता की उम्र का अनुमान लगाती है, वह किशोरों की पहचान करने में विफल साबित हो रही है।
  • अगले कदम की प्रतीक्षा: सरकार और रेगुलेटर्स ने उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में और अधिक मजबूत जांच तंत्र लागू किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी एकल बिंदु विफलता (single point of failure) न रहे।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रेलिया का यह 'वर्ल्ड-फर्स्ट' बैन फिलहाल कागजों तक ही सीमित दिख रहा है क्योंकि टेक कंपनियां अभी तक यह साबित नहीं कर पाई हैं कि वे बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स से सुरक्षित दूर रखने में सक्षम हैं।


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