ताजा खबर

ईरान तक पहुंचने के लिए ट्रंप प्रशासन ने बनाया था गुप्त बैकचैनल, बरजानी के जरिए IRGC से साधा संपर्क

Photo Source :

Posted On:Tuesday, August 18, 2026

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने और किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिशों के दौरान डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने एक गुप्त बैकचैनल तैयार किया था। इस चैनल के जरिए अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के शीर्ष नेतृत्व तक सीधे पहुंच बनाने की कोशिश की। यह जानकारी सामने आने के बाद अमेरिका-ईरान बातचीत के पीछे चल रही कूटनीतिक गतिविधियों की एक नई तस्वीर सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मई के मध्य तक अमेरिकी वार्ताकारों को यह चिंता होने लगी थी कि ईरान की तरफ से बातचीत कर रहे प्रतिनिधियों के पास IRGC के फैसलों पर पूरा नियंत्रण नहीं है। ऐसे में अमेरिका के लिए केवल आधिकारिक वार्ताकारों से बातचीत करना पर्याप्त नहीं रह गया था। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने IRGC नेतृत्व तक अलग रास्ते से पहुंच बनाने का फैसला किया।

बरजानी को क्यों चुना गया?

इस गुप्त संपर्क के लिए इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी को चुना गया। बरजानी के अमेरिका और ईरान, दोनों पक्षों के साथ लंबे समय से संपर्क रहे हैं। ईरान-इराक युद्ध के दौरान वह ईरान में रहे थे और उन्होंने तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की थी। उन्हें फारसी भाषा की अच्छी समझ है और ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारियों से उनके पुराने व्यक्तिगत संबंध बताए जाते हैं।

मई की शुरुआत में तत्कालीन अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गैबर्ड ने बरजानी से फोन पर बातचीत की। रिपोर्ट के अनुसार, यह संपर्क राष्ट्रपति ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की मंजूरी से किया गया था। गैबर्ड ने उनसे यह पता लगाने में मदद मांगी कि ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची जिस समझौते पर बातचीत कर रहे थे, क्या IRGC नेतृत्व भी उससे सहमत था या उसकी अलग मांगें थीं।

14 मई को IRGC से हुई सीधी बातचीत

बरजानी ने अपने ईरानी संपर्कों के जरिए संदेश पहुंचाया और IRGC कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से सीधे बात करने की इच्छा जताई। इसके बाद 14 मई को IRGC का एक अधिकारी एरबिल स्थित बरजानी के कार्यालय पहुंचा। उसके पास सुरक्षित बातचीत के लिए एन्क्रिप्टेड फोन था।

रिपोर्ट के अनुसार, बरजानी ने वाहिदी से पूछा कि क्या वह ईरानी वार्ताकारों के साथ हैं। जवाब में वाहिदी ने कथित तौर पर कहा कि वह बातचीत का समर्थन करते हैं और IRGC भी संकट का समाधान बातचीत के जरिए चाहता है। इसके बाद बरजानी ने अमेरिकी पक्ष को ईरान की स्थिति की जानकारी दी।

एरबिल में गुप्त बैठक का प्रस्ताव

IRGC की स्थिति जानने के बाद अमेरिकी प्रशासन ने आगे बढ़ते हुए एरबिल में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच गुप्त बैठक कराने का प्रस्ताव रखा। बरजानी ने यह संदेश ईरानी पक्ष तक पहुंचाया।

हालांकि, यह बैठक आगे नहीं बढ़ सकी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी अधिकारियों को सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी। उन्हें आशंका थी कि इजराइली खुफिया एजेंसियों की इराकी कुर्दिस्तान में मजबूत मौजूदगी है और एरबिल पहुंचने या वहां से लौटने के दौरान ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाया जा सकता है।

अमेरिका की असली चिंता क्या थी?

इस पूरे घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि अमेरिका की चुनौती केवल समझौते की शर्तों पर बातचीत करना नहीं थी, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी था कि जिन ईरानी प्रतिनिधियों से वह बात कर रहा है, उनके पास वास्तव में निर्णय लेने की शक्ति है।

IRGC ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में बेहद प्रभावशाली संस्था है। ऐसे में किसी भी बड़े समझौते को लागू कराने के लिए उसके रुख को समझना अमेरिकी रणनीति का अहम हिस्सा बन गया था। हालिया संघर्ष के बाद ईरान के सत्ता तंत्र में शक्ति संतुलन को लेकर अनिश्चितता ने इस चुनौती को और जटिल बनाया है।

फिलहाल पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थ अमेरिका और ईरान के बीच संदेश पहुंचाने में भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन बातचीत में बड़ी प्रगति नहीं हुई है। वहीं, बरजानी की ओर से फिर से बातचीत शुरू कराने में मदद की पेशकश किए जाने की खबर है। ऐसे में भविष्य की किसी भी कूटनीतिक कोशिश में यह बैकचैनल दोबारा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


बनारस और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



You may also like !

मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. banarasvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.