वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के मध्य जून में वर्साय में हुआ 60-दिवसीय अस्थायी विराम समझौता सोमवार को बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गया। दोनों देश स्थायी संघर्ष विराम, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को पूर्ण रूप से खोलने जैसे प्रमुख मुद्दों पर एक राय बनाने में विफल रहे। इस समझौते की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही पश्चिम एशिया में कूटनीतिक अनिश्चितता और सैन्य तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।
समझौते की अवधि के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर शर्तों के उल्लंघन के आरोप लगाए, जिससे प्रत्यक्ष द्विपक्षीय बातचीत ठप हो गई। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल नहीं हो सकी है, जहां रोजाना गुजरने वाले करीब 140 जहाजों के मुकाबले फिलहाल सीमित मालवाहक जहाजों को ही अनुमति मिल पा रही है। तेहरान ने जलमार्ग खोलने के बदले अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और क्षतिपूर्ति की शर्त रखी है, जिसे वाशिंगटन ने खारिज कर दिया है। जुलाई में तनाव उस वक्त और गहरा गया जब अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर सख्त आर्थिक प्रतिबंध और तेल व्यापार पर नाकाबंदी फिर से लागू कर दी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि अमेरिका के साथ सीधे संवाद के सभी रास्ते बंद हैं, हालांकि कतर और पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित रखना और तेहरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने से रोकना है।