भारतीय शेयर बाजार में रिकॉर्ड तेजी का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स को नया ऑल-टाइम हाई बनाए हुए 697 दिन का समय बीत चुका है, जिसके चलते बाजार 2012 के बाद से अपने 2 साल के सबसे खराब रिटर्न दौर से गुजर रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 37 फीसदी ट्रेडिंग दिन ऐसे रहे हैं जो 2 साल के नेगेटिव रिटर्न के साथ बंद हुए—यह आंकड़ा पिछले 14 सालों में सबसे चिंताजनक स्तर पर है। कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता, कमजोर ग्लोबल इंडीकेटर्स और घरेलू मांग में सुस्ती ने भारतीय इक्विटी बाजारों की रफ्तार को बांध रखा है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली की धीमी पड़ती गति और घरेलू रिटेल निवेशकों (DII) के अटूट भरोसे के दम पर एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि दलाल स्ट्रीट पर सुस्ती का यह लंबा दौर जल्द खत्म हो सकता है।
शेयर बाजार के आंकड़े क्या कह रहे हैं?
भारत के शेयर बाज़ार में लंबे समय से कमजोरी का दौर चल रहा है। बेंचमार्क इंडेक्स ने न सिर्फ पिछले एक साल में, बल्कि दो साल की अवधि में भी नेगेटिव रिटर्न दिया है। सेंसेक्स को नया ऑल-टाइम हाई छुए हुए अब 697 दिन हो चुके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में अब तक सेंसेक्स के 37 फीसदी ट्रेडिंग दिन नेगेटिव दो-साल के रिटर्न के साथ बंद हुए हैं, जो 2012 के बाद सबसे ज्यादा है।
एक साल की अवधि में यह कमजोरी और भी ज्यादा है। इस साल 62.3 फीसदी ट्रेडिंग दिन नेगेटिव एक-साल के रिटर्न के साथ बंद हुए, जो डेटासेट में सबसे ज्यादा है। इससे पहले 2012 में यह आंकड़ा 59 फीसदी था, उसके बाद 2016 में 58.3 फीसदी और 2008 में 47.6 फीसदी था। दो साल की स्थिति रिकॉर्ड के सबसे खराब दौर की तुलना में कम गंभीर है, लेकिन 2026 में 2012 के बाद से सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है।