सोशल मीडिया की लत और बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर इसके असर को लेकर चल रहे एक बड़े मुकदमे में इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी ने गवाही दी है। कैलिफोर्निया की ओकलैंड फेडरल कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोसेरी ने स्वीकार किया कि डिफॉल्ट सेटिंग बनने से पहले बहुत कम किशोरों ने इंस्टाग्राम के 'टेक अ ब्रेक' (Take a Break) फीचर का इस्तेमाल किया था।
मुख्य बिंदु:
'टेक अ ब्रेक' फीचर का सीमित उपयोग:
अमेरिकी राज्य कोलोराडो के वकील के सवालों का जवाब देते हुए मोसेरी ने माना कि सितंबर 2024 में इस फीचर को डिफॉल्ट किए जाने से पहले, इसका उपयोग करने वाले टीनेजर्स की संख्या बेहद कम (सिंगल डिजिट प्रतिशत में) थी। मोसेरी ने कहा, "ज्यादातर टीनेजर्स इसे नहीं चाहते थे, लेकिन फिर भी हमने इसे आगे बढ़ाया।"
29 अमेरिकी राज्यों का बड़ा मुकदमा:
अमेरिका के 29 राज्यों ने मेटा (Meta Platforms) के खिलाफ केस दर्ज किया है। राज्यों का आरोप है कि कंपनी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक को जानबूझकर ऐसा डिजाइन किया जिससे बच्चों में इसकी लत लगे, जिसके चलते टीनेजर्स में एंग्जायटी, डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। साथ ही 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा बिना अनुमति जुटाने का भी आरोप है।
200 अरब डॉलर के जुर्माने की मांग:
मुकदमे में राज्यों ने मेटा पर लगभग 200 अरब डॉलर (लगभग ₹16.6 लाख करोड़) तक का नागरिक जुर्माना लगाने की मांग की है।
डेटा छिपाने के आरोपों का खंडन:
मोसेरी ने इस बात से इनकार किया कि इंस्टाग्राम ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े आंतरिक शोध या डेटा को जानबूझकर छिपाया या वकीलों के जरिए फिल्टर कराया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी जो भी जानकारी सार्वजनिक की जाए, वह उच्च गुणवत्ता और विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित होनी चाहिए।
पृष्ठभूमि:
यह मुकदमा सोशल मीडिया कंपनियों के बच्चों और किशोरों पर पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभावों को लेकर अब तक के सबसे बड़े कानूनी परीक्षणों में से एक माना जा रहा है। मेटा ने अपने बचाव में कहा है कि उसका उद्देश्य बच्चों को लती बनाना नहीं है और सोशल मीडिया इस्तेमाल तथा मानसिक स्वास्थ्य के नुकसान के बीच कोई सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है।