देश में हवाई अड्डों के निजीकरण का अगला चरण अब शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के 11 एयरपोर्ट्स को प्राइवेट हाथों में सौंपने की पूरी तैयारी कर चुकी है। हालांकि, इस बार की प्रक्रिया में एक बहुत बड़ा और अहम बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी एक ही निजी कंपनी के पास बहुत ज्यादा ताकत या एकाधिकार (मोनोपॉली) न जाए, इसलिए आगामी नीलामी प्रक्रिया में किसी एक प्राइवेट बिडर द्वारा जीते जाने वाले एयरपोर्ट बंडलों की संख्या पर सख्त सीमा (लिमिट) तय की जाएगी। पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप अप्रेजल कमेटी (PPPAC) पहले ही इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है।
5 बंडलों में बांटे गए हैं 11 हवाई अड्डे
नागरिक उड्डयन मंत्रालय की योजना के तहत इन 11 हवाई अड्डों को पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए लीज पर देने के लिए कुल 5 बंडलों में बांटा गया है, और हर एक बंडल किसी एक चुनिंदा कंपनी को सौंपा जाएगा। इन पांच बंडलों में निम्नलिखित एयरपोर्ट शामिल हैं:
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अमृतसर और कांगड़ा
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वाराणसी, गया और कुशीनगर
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भुवनेश्वर और हुबली
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रायपुर और औरंगाबाद
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तिरुचिरापल्ली और तिरुपति
इन 11 एयरपोर्ट्स का जिम्मा संभालने वाली प्राइवेट कंपनियों को आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए लगभग 8,622 करोड़ रुपये का भारी-भरकम निवेश करना होगा। सरकार के इस कदम से जहां क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, वहीं एकाधिकार पर रोक लगने से बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बनी रहेगी।