उबले अंडे को छीलते समय कई बार जर्दी (yolk) के चारों तरफ एक पतली स्लेटी या हरी (grey-green) रिंग दिखाई देती है। इसे देखकर अक्सर लोग भ्रमित हो जाते हैं कि अंडा खराब हो चुका है या खाने योग्य नहीं है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है; यह एक सामान्य रासायनिक प्रक्रिया का परिणाम है और अंडा खाना पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
रंग बदलने का कारण
- रासायनिक प्रतिक्रिया: जब अंडे को तय समय से ज्यादा देर तक या बहुत अधिक तापमान पर उबाला जाता है, तो अंडे की सफेदी में मौजूद सल्फर और जर्दी में मौजूद आयरन आपस में रिएक्ट करते हैं।
- आयरन सल्फाइड: इस रासायनिक क्रिया से जर्दी की बाहरी सतह पर आयरन सल्फाइड (Iron Sulphide) की एक परत बन जाती है, जो देखने में स्लेटी-हरी नजर आती है।
क्या ऐसा अंडा खाना चाहिए?
- सेहत के लिए नुकसानदेह नहीं: यदि अंडा ताजा था और ठीक से उबाला गया है, तो यह परत पूरी तरह हानिरहित होती है। अंडे के प्रोटीन, विटामिन B12 और कोलीन जैसे पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।
- स्वाद और बनावट में फर्क: ज्यादा पकने के कारण जर्दी थोड़ी सूखी (dry) और सख्त महसूस हो सकती है, जिससे खाने का अनुभव थोड़ा बदल सकता है।
इससे बचने के उपाय और जरूरी सावधानियां
- ठंडे पानी का उपयोग: अंडे को जरूरत से ज्यादा देर तक न उबालें। उबलने के तुरंत बाद अंडों को बर्फ या ठंडे पानी में डाल दें; इससे ओवरकुकिंग तुरंत रुक जाती है और छिलका उतारना भी आसान होता है।
- कब अंडा न खाएं: अगर उबले अंडे से सड़ी हुई दुर्गंध आ रही हो, वह चिपचिपा हो या कई घंटों तक सामान्य तापमान पर खुला रखा रहा हो, तो उसे बिल्कुल न खाएं।
जर्दी पर स्लेटी रिंग सिर्फ यह दर्शाती है कि अंडा जरूरत से थोड़ा ज्यादा पक गया है, इसका मतलब अंडा खराब होना बिल्कुल नहीं है।