इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बड़ी संजीवनी: लीथियम आयन बैटरी और डिस्प्ले असेंबली के पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क पूरी तरह शून्य, घरेलू विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली: देश के इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र के इंडस्ट्रियल लॉजिस्टिक्स को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद कड़ा और विखंडनकारी नीतिगत कदम उठाया है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने तीन अलग-अलग विधिक अधिसूचनाओं के नियमों के तहत लीथियम-आयन सेल, ऑटोमोटिव डिस्प्ले असेंबली और वायरलेस चार्जिंग के इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली पूंजीगत वस्तुओं और पुर्जों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) को कड़ाई से घटाकर शून्य कर दिया है। सरकार के इस कूटनीतिक विलेख का मुख्य उद्देश्य घरेलू मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देना और विनिर्माण इंफ्रास्ट्रक्चर के पुराने विवादों को पूरी तरह समाप्त करना है।
इस सांख्यिकी सुधार के सबसे महत्वपूर्ण विन्यास के तहत, सरकार ने लिथियम-आयन सेल के निर्माण से जुड़ी अंतिम उपयोग (End-use) की कड़क शर्त को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। पहले यह छूट केवल मोबाइल फोन या इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) तक सीमित थी, लेकिन अब सभी प्रकार के लिथियम-आयन सेल विनिर्माण को इस दायरे में लाकर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। इसके साथ ही, ऑटोमोटिव, चिकित्सा और औद्योगिक उपकरणों में उपयोग होने वाली डिस्प्ले असेंबली के पुर्जों पर दी गई यह विधिक छूट 31 मार्च 2029 तक जारी रहेगी। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि टेलीविजन और सेलुलर फोन के इनपुट्स पर पहले से ही रियायती शुल्क संरचना लागू है, इसलिए उन्हें इस नए नियम से बाहर रखा गया है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस विखंडनकारी टैक्स छूट से भारत आने वाले समय में वैश्विक टेक सप्लाई चेन के एक बड़े केंद्र के रूप में पूरी तरह मुस्तैद हो जाएगा।