भारतीय मुद्रा में मामूली सुधार: कच्चे तेल की नरमी और विदेशी निवेशकों की लिवाली से रुपया एक पैसा मजबूत, डॉलर के मुकाबले ₹95.47 पर बंद
मुंबई: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों के बदलते नियमों और घरेलू लॉजिस्टिक्स के बीच भारतीय मुद्रा में गुरुवार, 9 जुलाई 2026 को मामूली सुधार देखा गया। अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में दिनभर चले कड़े उतार-चढ़ाव और कूटनीतिक विवादों के बाद रुपया अंततः अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक पैसा मजबूत होकर ₹95.47 प्रति डॉलर के स्तर पर विधिक रूप से बंद हुआ। इससे पिछले कारोबारी दिवस पर भारतीय मुद्रा में 52 पैसे की बड़ी सांख्यिकी गिरावट दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह ₹95.48 प्रति डॉलर पर आ गया था। मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी नरमी और भारतीय पूंजी बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की गई कड़क लिवाली से रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर को यह महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ है।
कारोबारी विलेखों के नियमों के अनुसार, आज सुबह रुपये की शुरुआत बेहद सुस्त रही और यह चार पैसे की विखंडनकारी कमजोरी के साथ ₹95.52 प्रति डॉलर पर खुला था। बीच कारोबार के दौरान डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया नीचे फिसलकर ₹95.58 के स्तर तक चला गया था, लेकिन विदेशी फंडों की भारी आवक के कारण यह सुधार करते हुए ₹95.28 के उच्च स्तर तक भी पहुंचा। हालांकि, बाजार बंद होने के समय डॉलर की कड़क लिवाली आने से यह ₹95.47 पर मुस्तैद हुआ। वैश्विक मोर्चे पर, लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा एक प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट के साथ $77 प्रति बैरल के करीब आ गया। इसके साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार में 97.79 करोड़ डॉलर के बड़े पूंजी निवेश के सांख्यिकी आंकड़ों ने घरेलू मुद्रा को ऐतिहासिक गिरावट के पुराने विवादों से बाहर निकालने में एक गेम-चेंजर नियमन की भूमिका निभाई।