देश में आगामी त्योहारों का सीजन शुरू होते ही आम जनता की रसोई पर महंगाई की एक और मार पड़ी है. चीनी के दामों में आई तेजी के बाद अब घरेलू बाजारों में गुड़ के भाव भी आसमान छूने लगे हैं. खुदरा बाजारों में जो गुड़ कुछ समय पहले तक 40 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम की साधारण दर पर आसानी से उपलब्ध था, उसके दाम अब बढ़कर 80 से 90 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं.
गौरतलब है कि भारत दुनिया में गुड़ उत्पादन के मामले में सबसे आगे है और वैश्विक उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा यहीं तैयार होता है. इसके बावजूद, स्थानीय बाजारों में गुड़ का यह संकट मुख्य रूप से नए पेराई सत्र में हो रही देरी और पुराने स्टॉक के घटने के कारण पैदा हुआ है. चीनी महंगी होने की वजह से मिठाई निर्माताओं और आम उपभोक्ताओं ने गुड़ का विकल्प अपनाना शुरू कर दिया, जिससे इसकी मांग में अचानक भारी वृद्धि दर्ज की गई.
इसके अतिरिक्त, एथेनॉल निर्माण के लिए गन्ने के रस और बाय-प्रोडक्ट्स के बढ़ते उपयोग ने भी गुड़ के उत्पादन को प्रभावित किया है. वहीं दक्षिण भारत में, विशेषकर ओणम जैसे बड़े क्षेत्रीय पर्वों के दौरान गुड़ और चीनी की मांग कई गुना बढ़ जाती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला पर अतिरिक्त दबाव बन गया है. इन सभी कारणों के मेल ने मिठास के इस पारंपरिक साधन को आम उपभोक्ता की पहुंच से दूर कर दिया है