भारतीय शेयर बाजार को लेकर मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने बड़ा अनुमान जताया है। उनका मानना है कि अगले छह से नौ वर्षों के भीतर निफ्टी अपने मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना हो सकता है। इस हिसाब से निफ्टी 2035 से पहले 50,000 के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने की स्थिति में आ सकता है।
मुंबई में आयोजित 22वीं मोतीलाल ओसवाल एनुअल ग्लोबल इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस में रामदेव अग्रवाल ने बाजार को लेकर अपना आकलन सामने रखा। उनका यह अनुमान भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, कंपनियों की मजबूत होती कमाई और शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी पर आधारित है।
निफ्टी 50 हजार तक कैसे पहुंचेगा?
रामदेव अग्रवाल के मुताबिक निफ्टी में शामिल कंपनियों की कमाई यानी अर्निंग्स अगर लंबे समय तक करीब 12 फीसदी की सालाना दर से बढ़ती रहती है, तो इंडेक्स के लिए तेजी की मजबूत गुंजाइश बनी रह सकती है। उनका अनुमान देश की संभावित आर्थिक वृद्धि से भी जुड़ा हुआ है।
हालांकि, निफ्टी का भविष्य केवल कंपनियों की कमाई पर निर्भर नहीं करता। बाजार का वैल्यूएशन यानी P/E मल्टीपल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी आधार पर उन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में निफ्टी के 50,000 के स्तर तक पहुंचने का संभावित समय बताया है।
अगर बाजार का P/E मल्टीपल मौजूदा करीब 20-21 गुना के आसपास बना रहता है, तो निफ्टी को 50,000 तक पहुंचने में लगभग आठ साल लग सकते हैं। यानी स्थिर वैल्यूएशन और लगातार बढ़ती कमाई के आधार पर भी लंबी अवधि में इंडेक्स के दोगुना होने की संभावना बनती है।
वहीं, अगर बाजार में निवेशकों का उत्साह बढ़ता है और P/E मल्टीपल करीब 24 गुना तक पहुंच जाता है, तो निफ्टी 50,000 का स्तर अपेक्षाकृत कम समय में हासिल कर सकता है। दूसरी तरफ, अगर वैल्यूएशन में गिरावट आती है, तो इस लक्ष्य तक पहुंचने में ज्यादा समय लग सकता है।
रिटेल निवेशकों की बढ़ती ताकत
भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रिटेल निवेशकों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हुई है। बड़ी संख्या में लोग सीधे शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर रहे हैं। सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP के माध्यम से आने वाला पैसा भी बाजार को लंबे समय का सपोर्ट देता है।
रामदेव अग्रवाल के अनुमान में यह बदलाव भी अहम है। घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से भारतीय बाजार की विदेशी निवेशकों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है। इससे बाजार में घरेलू पूंजी का आधार मजबूत होने की उम्मीद रहती है।
क्या सच में 2035 से पहले 50 हजार पार करेगा निफ्टी?
निफ्टी के 50,000 तक पहुंचने का अनुमान आकर्षक जरूर है, लेकिन इसे निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। शेयर बाजार में आर्थिक विकास, कंपनियों की कमाई, ब्याज दरें, महंगाई, वैश्विक बाजार और निवेशकों की धारणा जैसे कई कारक इंडेक्स की दिशा तय करते हैं।
अगर भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहती है और निफ्टी कंपनियों की कमाई अनुमानित गति से बढ़ती है, तो लंबी अवधि में इंडेक्स के लिए तेजी का माहौल बन सकता है। लेकिन बाजार में उतार-चढ़ाव हमेशा बना रहता है और किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने की यात्रा सीधी नहीं होती।
इसलिए रामदेव अग्रवाल का 50,000 वाला अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट अर्निंग्स की लंबी अवधि की संभावनाओं पर आधारित एक आशावादी परिदृश्य है। निवेशकों को ऐसे अनुमानों को समझते समय बाजार के जोखिम और अपनी निवेश क्षमता को भी ध्यान में रखना चाहिए।