भारत के वस्तु निर्यात में जुलाई के दौरान दर्ज हुई तेज वृद्धि को निर्यात क्षेत्र ने अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत बताया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय कंपनियों का बेहतर प्रदर्शन उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और बदलते हालात के अनुरूप रणनीति बनाने की क्षमता को दर्शाता है।
जुलाई में भारत का वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 19 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 44.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इसी अवधि में आयात बढ़ने से व्यापार घाटा भी बढ़कर लगभग 31.98 अरब डॉलर हो गया। फियो ने निर्यात की मौजूदा रफ्तार को कायम रखने के साथ आयात और घरेलू उत्पादन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
रल्हन के मुताबिक वैश्विक व्यापार इस समय भू-राजनीतिक तनाव, समुद्री परिवहन में व्यवधान, माल ढुलाई की बदलती लागत और अलग-अलग देशों की व्यापार नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियों से प्रभावित है। ऐसे माहौल में भारतीय निर्यातकों को लगातार नीतिगत सहयोग मिलना जरूरी है।
उन्होंने सरकार से निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने, कारोबार के लिए कार्यशील पूंजी की आसान पहुंच और व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने की मांग की। उनके अनुसार बंदरगाहों, परिवहन व्यवस्था और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाओं में सुधार से निर्यात लागत कम करने में मदद मिलेगी।
फियो अध्यक्ष ने विशेष रूप से एमएसएमई और श्रम आधारित उद्योगों को अतिरिक्त सहायता देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि भारत को कुछ चुनिंदा विदेशी बाजारों पर निर्भर रहने के बजाय नए बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए।
रल्हन ने आयात पर निर्भरता घटाने के लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता मजबूत करने की भी वकालत की। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली जरूरी सामग्री का देश में निर्माण बढ़ने से बाहरी क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है। उन्होंने कहा कि निर्यात विस्तार के साथ रणनीतिक आयात प्रतिस्थापन को समानांतर रूप से आगे बढ़ाना भारत की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती के लिए उपयोगी होगा।