लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और महंगे वैश्विक रसद खर्चों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर अभूतपूर्व लचीलापन प्रदर्शित किया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताज़ा व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, जुलाई महीने में भारत का मूर्त वस्तुओं (Merchandise Exports) का निर्यात सालाना आधार पर 19.63 प्रतिशत बढ़कर 44.24 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस अप्रत्याशित वृद्धि का मुख्य श्रेय इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पादों और समुद्री खाद्य पदार्थों की मजबूत अंतरराष्ट्रीय मांग को जाता है।
हालांकि, इस अवधि के दौरान कच्चे तेल, उर्वरक और कोयले की उच्च आयात लागत के कारण भारत का कुल आयात बढ़कर 76.22 अरब डॉलर पहुंच गया। आयात में आई इस तीव्र गति की वजह से देश का व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 31.98 अरब डॉलर के छह महीने के उच्च स्तर पर आ गया। इसके विपरीत, कस्टम ड्यूटी में वृद्धि के बाद सोने-चांदी के आयात में गिरावट दर्ज की गई, जिससे कुल घाटे पर कुछ नियंत्रण संभव हो सका।
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बावजूद इस क्षेत्र को भारत का निर्यात 8.62 प्रतिशत बढ़ा है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और एफआईईओ (FIEO) अध्यक्ष एससी राल्हन के अनुसार, आसियान देशों, अमेरिका, चीन और तंजानिया जैसे विविध बाजारों में भारतीय सामानों की मांग में तेजी आई है। इसके साथ ही, नाथू ला दर्रे के जरिए सीमा पार व्यापार की पुनर्बहाली ने क्षेत्रीय आर्थिक संबंधों को मजबूती प्रदान की है। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई अवधि में कुल सामान का निर्यात 17.04% बढ़कर 173.78 अरब डॉलर हो चुका है।