असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर तय की गई है। वित्तीय विशेषज्ञों और कर सलाहकारों ने करदाताओं को सलाह दी है कि केवल रिपोर्ट जमा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि फाइल की जा चुकी रिपोर्ट की पुनरीक्षा करना भी अनिवार्य है। जल्दबाजी में की गई गलतियां, जैसे UDIN नंबर की अन-एक्सेप्टेड स्थिति, HSN/SAC कोड की गलत प्रविष्टि या फॉर्म 26AS/AIS से टर्नओवर का बेमेल होना, सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस का कारण बन सकती हैं।
विशेष रूप से इस वर्ष एमएसएमई (MSME) भुगतानों से संबंधित सेक्शन 43B(h) के तहत क्लॉज 22 में हुए संशोधनों और क्लॉज 36B में शेयर बायबैक की जानकारी देने के नियमों को लेकर विभाग अत्यधिक सख्त है। यदि किसी टैक्सपेयर को जमा की जा चुकी रिपोर्ट में कोई लिपिकीय या गणनात्मक त्रुटि मिलती है, तो वह 30 सितंबर से पहले अपनी ऑडिट रिपोर्ट को रिवाइज कर सकता है। हालांकि, व्यावसायिक आय के स्वरूप को पूरी तरह बदलने जैसे मूलभूत संशोधनों की अनुमति नहीं है।
यदि 30 सितंबर की समयसीमा समाप्त हो जाती है, तो भी सीए (Chartered Accountant) द्वारा प्रमाणित कराकर रिपोर्ट को 31 मार्च 2027 तक संशोधित किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि 31 अक्टूबर तक फाइल किए जाने वाले इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) का मिलान अंतिम टैक्स ऑडिट रिपोर्ट से होना अनिवार्य है, अन्यथा रिटर्न को त्रुटिपूर्ण (Defective) माना जा सकता है।