ऋषि कपूर का जन्मदिन उनके चाहने वालों के लिए हमेशा पुरानी खूबसूरत यादों को ताजा करने वाला दिन रहा है। 4 सितंबर को दिवंगत अभिनेता को उनके जन्मदिन पर याद करते हुए गायक और संगीतकार अदनान सामी ने ऐसा संगीतमय तोहफा दिया, जिसने भावुक कर दिया। सामी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह पियानो बजाते हुए ऋषि कपूर की फिल्म ‘बॉबी’ के लोकप्रिय गीत ‘मैं शायर तो नहीं’ को अपनी आवाज दे रहे हैं। वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, “हैप्पी बर्थडे ऋषि कपूर, आज आपकी बहुत याद आ रही है।” चंद शब्दों का यह संदेश दोस्ती की गहराई बयां करने के लिए काफी था।
अदनान सामी का यह अंदाज इसलिए भी खास है क्योंकि ‘मैं शायर तो नहीं’ महज एक गाना नहीं, बल्कि ऋषि कपूर के शुरुआती फिल्मी सफर की पहचान से जुड़ा हुआ है। ‘बॉबी’ ने उन्हें युवा दिलों का चहेता बना दिया था और उनकी रोमांटिक छवि ने लंबे समय तक दर्शकों के दिल पर राज किया। सामी ने जब इस गीत को पियानो पर अपनी टीम के साथ गाया, तो पुराने दौर की वही मिठास एक बार फिर महसूस हुई। उनकी आवाज में गीत सुनना ऐसा लगा जैसे हिंदी सिनेमा की पुरानी यादों की कोई खिड़की अचानक खुल गई हो।
4 सितंबर 1952 को जन्मे ऋषि कपूर ने अपने करीब पांच दशक लंबे करियर में कई रंग दिखाए। शुरुआत में वह बॉलीवुड के चमकते हुए रोमांटिक हीरो और ‘चॉकलेट बॉय’ के तौर पर पहचाने गए, लेकिन वक्त के साथ उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का एक अलग ही चेहरा सामने रखा। उन्होंने उम्र बढ़ने के साथ चुनौतीपूर्ण किरदारों को अपनाया और साबित किया कि एक कलाकार के लिए किसी एक छवि में बंधे रहना जरूरी नहीं है। यही वजह है कि उनकी फिल्मोग्राफी में रोमांस के साथ-साथ हास्य, गंभीरता और दमदार चरित्रों की भी भरमार देखने को मिलती है।
ऋषि कपूर और अदनान सामी की दोस्ती भी बेहद खास थी। दोनों की मुलाकात 1990 के दशक की शुरुआत में लाहौर में हुई थी और इसके बाद उनके बीच गहरी दोस्ती कायम हो गई। सामी उन्हें प्यार से ‘चिंटू’ कहकर बुलाते थे। यही व्यक्तिगत रिश्ता इस श्रद्धांजलि को और भावुक बना देता है। यह किसी कलाकार द्वारा दूसरे कलाकार को याद करने भर की बात नहीं थी, बल्कि एक दोस्त की अपने दोस्त को दी गई याद थी। शायद इसलिए सामी का छोटा-सा संदेश और ‘मैं शायर तो नहीं’ की धुन सीधे दिल तक पहुंचती है।
ऋषि कपूर ने 30 अप्रैल 2020 को 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया था, लेकिन उनकी फिल्मों और गीतों ने उनकी मौजूदगी को अब भी कायम रखा है। उनके जन्मदिन पर अदनान सामी ने लंबा भाषण देने के बजाय संगीत को अपनी भावनाओं की आवाज बनाया। पियानो की धुन और सामी की आवाज के साथ ‘मैं शायर तो नहीं’ सुनना ऋषि कपूर को याद करने का बेहद खूबसूरत तरीका बन गया। सितारे पर्दे से चले जाते हैं, लेकिन उनकी मुस्कान, किरदार और उनसे जुड़ी धुनें अक्सर वहीं रह जाती हैं—हमारी यादों में।
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