बनारस न्यूज डेस्क: श्रावण पूर्णिमा के मौके पर काशी में बाबा विश्वनाथ का पारंपरिक झूलनोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ सपरिवार झूले पर विराजे तो पूरा धाम भक्तिमय हो उठा। भक्तों ने झूले की डोर थामकर भोलेनाथ को झुलाया और सुख-समृद्धि के साथ लोकमंगल की कामना की। टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास से पंचबदन बाबा की चल प्रतिमा पालकी में सवार होकर काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंची।
झूलनोत्सव से पहले महंत आवास पर बाबा का गोदुग्ध से अभिषेक और विशेष पूजन किया गया। पं. सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने मंत्रोच्चार के बीच शिव परिवार की चल प्रतिमा का पूजन किया। इसके बाद फूल-पत्तियों से बाबा का राजसी शृंगार किया गया और उन्हें फूलों से बनी राखी भी अर्पित की गई। शंख, घंटे, वैदिक मंत्र और हर हर महादेव के जयघोष के बीच पूरा परिसर भक्तिरस में डूबा रहा।
शाम को बाबा की पालकी यात्रा महंत आवास से काशी विश्वनाथ मंदिर के लिए निकली। साक्षी विनायक और ढुंढिराज गणेश होते हुए पालकी विश्वनाथ धाम पहुंची। रास्ते भर भक्तों ने हर हर महादेव के जयकारे लगाए। मंदिर पहुंचने के बाद पंचबदन बाबा की प्रतिमा को विधि-विधान से गर्भगृह में झूले पर विराजमान कराया गया। इसके बाद भक्तों को बाबा के विशेष झूला शृंगार के दर्शन हुए और पं. वाचस्पति तिवारी ने दीक्षित मंत्र से पूजन किया।
इस झूलनोत्सव में एक खास परंपरा भी देखने को मिली। वर्ष 2022 से पहले बाबा की प्रतिमा को श्वेत वस्त्रों से ढककर मंदिर ले जाया जाता था। लेकिन 2022 में पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने स्वतंत्रता के अमृत उत्सव के अवसर पर पंचबदन प्रतिमा को बिना ढके मंदिर ले जाने की शुरुआत की। तब से हर साल बाबा की प्रतिमा को बिना ढके ही मंदिर तक ले जाने की परंपरा जारी है।