संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गईं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र की एनडीए सरकार की शिक्षा नीतियों, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और विरोधी दलों से जुड़ी संस्थाओं के प्रति कठोर रवैये पर कड़ा प्रहार किया।
अखिलेश यादव ने चर्चा के दौरान रामपुर स्थित स्वतंत्रता सेनानी मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर बनी 'मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी' पर प्रशासनिक कार्रवाई का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जहां एक ओर माध्यमिक विद्यालयों को बंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर निजी स्तर पर खड़े किए गए शिक्षा के मंदिरों को राजनीतिक द्वेषवश हथौड़ा लेकर ध्वस्त करने पर आमादा है।
देशभर में लगातार हो रहे पेपर लीक हादसों और नीट (NEET) परीक्षा विवाद को लेकर सपा प्रमुख ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर हो रही परीक्षा धांधली से युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो गया है। अखिलेश यादव ने मांग की कि पेपर लीक की वजह से मानसिक तनाव में आकर जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को सरकार 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान करे।
सरकार की कार्यप्रणाली पर तंज कसते हुए सपा सांसद ने कहा कि जब जनआक्रोश चरम पर होता है और सरकार डरती है, तभी मांगें मानी जाती हैं—जैसा कि किसान आंदोलन के समय देखने को मिला था। उन्होंने कहा कि छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है।