फिल्म अभिनेत्री और मंडी से सांसद कंगना रनौत ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र प्रदर्शन और उससे जुड़ी सोशल मीडिया रील्स को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने प्रदर्शन में शामिल कुछ Gen Z युवाओं के व्यवहार, भाषा और प्रस्तुति शैली की आलोचना करते हुए उन्हें "उल्टी लाने वाला" (Puke-Inducing), "अशिष्ट" (Crass) और "परेशान करने वाला" (Jarring) बताया। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
कंगना रनौत ने कहा कि प्रदर्शन से जुड़ी कुछ वायरल रील्स और वीडियो देखकर उन्हें हैरानी हुई। उनके अनुसार, इन वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा और व्यवहार भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसे युवाओं का पालन-पोषण किस तरह हुआ है, जो सार्वजनिक मंचों पर इस प्रकार की अभिव्यक्ति को सामान्य मानते हैं।
अपने बयान में कंगना ने भारत की सांस्कृतिक विरासत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसी सभ्यता है जो शालीनता, लालित्य और सांस्कृतिक परिपक्वता के लिए जानी जाती है। उनके मुताबिक, देश की पहचान उसकी समृद्ध परंपराओं और सभ्य संवाद की संस्कृति से है, इसलिए सार्वजनिक आंदोलनों में भी गरिमा बनाए रखना जरूरी है।
कंगना ने उन प्रदर्शनकारियों पर भी टिप्पणी की जो व्यंग्य या मजाक में स्वयं को "कॉकरोच" कहकर संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा और प्रस्तुति समाज में सकारात्मक संदेश देने के बजाय नकारात्मक छवि पेश करती है। उनका मानना है कि विरोध दर्ज कराने का अधिकार लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उसकी अभिव्यक्ति मर्यादित और जिम्मेदार होनी चाहिए।
कंगना रनौत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में शालीनता और जिम्मेदारी बनाए रखना आवश्यक है। वहीं कुछ अन्य यूजर्स ने उनके विचारों से असहमति जताई और कहा कि युवाओं की अभिव्यक्ति की शैली समय के साथ बदलती रहती है।
यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनौत ने सामाजिक या राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वह कई राष्ट्रीय और समसामयिक विषयों पर बेबाक बयान देती रही हैं। उनके बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं और सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ देते हैं।
फिलहाल, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और उन पर आई विभिन्न प्रतिक्रियाओं के बीच कंगना रनौत का यह बयान भी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह मामला एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सार्वजनिक आचरण और सामाजिक मूल्यों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोणों को सामने ला रहा है।