राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्वास्थ्य में तीव्र गिरावट तथा रात भर अस्पताल में ड्रिप (IV) व रक्त जांच के उपचार के उपरांत पुनः धरना स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को और अधिक तीव्र करने का आह्वान किया है। दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया कि शारीरिक दुर्बलता के बावजूद उनका रणनीतिक विन्यास और संकल्प कमजोर नहीं हुआ है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की है, जिस पर संगठन पूरी तरह अड़ा हुआ है।
हालिया घटनाक्रम को संबोधित करते हुए अभिजीत दीपके ने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई हिंसक झड़पों और सोनम वांगचुक के 26 दिनों के लंबे अनशन का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक हठधर्मिता के खिलाफ अब केवल मंत्री का पदत्याग ही एकमात्र स्वीकार्य समाधान है। दूसरी ओर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के पश्चात सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के निजी अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया है।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि वांगचुक के अनशन समाप्ति के एवज में सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर दायर विधिक मामलों को वापस लेने और घायलों को मुआवजा प्रदान करने पर सहमति जताई है। हालांकि, औपचारिक लिखित आदेश प्राप्त होने तक जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का मुस्तैद क्रियान्वयन जारी रहेगा। संगठन ने दोटूक कहा है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पदमुक्त नहीं होते, तब तक रोजाना धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बढ़ते गतिरोध से प्रशासनिक व्यवस्था और छात्र आंदोलन के बीच का सांख्यिकी संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा है।