कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने देश की शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर कड़ा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे छात्रों के प्रति सरकार का रवैया गैर-जिम्मेदाराना और क्रूर रहा है. सोनिया गांधी के अनुसार, सरकार युवाओं को देश का भविष्य मानने के बजाय उनके साथ 'राष्ट्र के दुश्मनों' जैसा व्यवहार कर रही है.
अंग्रेजी समाचार पत्र 'द हिंदू' में प्रकाशित अपने लेख "शिक्षा व्यवस्था का पतन, युवा भारत की पीड़ा" में सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों का बढ़ता जनाक्रोश कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि यह चरमराती शिक्षा प्रणाली और सरकार के अड़ियल रवैये का नतीजा है.
सोनिया गांधी के बयान की मुख्य बातें
-
कायरता और क्रूरता का आरोप: सोनिया गांधी ने कहा कि छात्रों ने सरकार से केवल जवाबदेही और सुधार की मांग की थी, लेकिन बदले में उन्हें पुलिसिया बर्बरता का सामना करना पड़ा.
-
अहंकार और जवाबदेही से इनकार: उन्होंने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को स्वीकार करने या रचनात्मक कदम उठाने से लगातार बच रही है.
-
पुरानी घटनाओं का जिक्र: उन्होंने 2020 के CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान यूनिवर्सिटी कैंपस में पुलिस कार्रवाई और महिला पहलवानों के आंदोलन का हवाला देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करना इस सरकार की पुरानी आदत बन चुका है.
-
संवैधानिक दायित्व: उन्होंने जोर देकर कहा कि छात्रों के अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा करना पूरे देश का नैतिक, राजनीतिक और संवैधानिक कर्तव्य है.
पीएम मोदी का संदेश और सख्त कानून का आश्वासन
दूसरी तरफ, देश में परीक्षाओं की सुचिता और पेपर लीक जैसी समस्याओं को रोकने के लिए सरकार भी कड़े कदम उठाने की बात कह रही है.
प्रधानमंत्री का बयान: विरोध और विवादों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रिकॉर्डेड संदेश में स्पष्ट किया कि सरकार धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ एक बेहद सख्त कानून ला रही है. इसमें त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) के गठन और दोषियों के लिए कठोर सजा के कड़े प्रावधान शामिल होंगे.