डिजिटल माध्यमों से हवाई टिकट बुक करने वाले यात्रियों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नियमों का उल्लंघन करने और अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 'डार्क पैटर्न' (Dark Patterns) जैसी भ्रामक तकनीकों का उपयोग करने के आरोप में प्रमुख बजट एयरलाइन कंपनी 'स्पाइसजेट' (SpiceJet) पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। सीसीपीए की गहन जांच में यह बात सामने आई है कि एयरलाइन कंपनी अपनी आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल एप्लिकेशन पर एक ऐसी चालाकी भरी डिजिटल डिजाइन का उपयोग कर रही थी, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित कर उनकी स्पष्ट सहमति के बिना ही कई अनचाही सेवाओं को जबरन लागू कर देती थी।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, स्पाइसजेट के टिकट बुकिंग पेज पर कई विकल्प पहले से ही टिक (Pre-ticked) किए हुए मिलते थे। इसके चलते कई हवाई यात्री अनजाने में ही कंपनी के 'स्पाइसक्लब' (SpiceClub) लॉयल्टी प्रोग्राम के सदस्य बन जाते थे। इसके अतिरिक्त, इस धोखेबाज इंटरफेस के कारण यात्रियों की अनुमति के बिना ईमेल, व्हाट्सएप और एसएमएस के जरिए विभिन्न प्रकार के प्रमोशनल और विज्ञापनी संदेश प्राप्त करने की सहमति खुद-ब-खुद दर्ज हो जाती थी। नियामक संस्था ने साफ किया कि इस तरह के प्री-सिलेक्टेड बॉक्स के जरिए ली गई सहमति को किसी भी परिस्थिति में वैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 और ई-कॉमर्स नियम 2020 का सीधा उल्लंघन है।
प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में नोटिस जारी किए जाने के बाद भी एयरलाइन ने अपनी कार्यप्रणाली में आंशिक बदलाव तो किया, लेकिन ग्राहकों से जबरन प्रमोशनल सहमति लेने की मुख्य प्रक्रिया में पूरी तरह सुधार नहीं किया। सीसीपीए के मुताबिक, उपभोक्ताओं को बिना स्पष्ट मंजूरी के लॉयल्टी प्रोग्राम में शामिल करना और भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल करना पूरी तरह गैर-कानूनी है। इस कार्रवाई के माध्यम से सरकार ने सभी ई-कॉमर्स और डिजिटल कंपनियों को एक कड़ा संदेश दिया है कि ऑनलाइन व्यापार में पारदर्शिता बरतना अनिवार्य है और ग्राहकों की अज्ञानता का फायदा उठाकर उनके अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।