मुंबई: वैश्विक दबावों और घरेलू शेयर बाजार में आई जोरदार तेजी के बीच अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार (फॉरेक्स मार्केट) में भारतीय रुपये ने शानदार वापसी की है। सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन डॉलर की चौतरफा बिकवाली बढ़ने से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 12 पैसे की मजबूती के साथ 96.30 रुपये (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ। भारतीय मुद्रा में आई यह लगातार तीसरे दिन की बढ़त है, जिससे बाजार विश्लेषकों और निवेशकों को बड़ी राहत मिली है। इससे पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू मुद्रा 17 पैसे की गिरावट के साथ 96.42 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई थी।
विदेशी मुद्रा डीलरों के मुताबिक, शुक्रवार को रुपये की शुरुआत बेहद सकारात्मक रही और यह सात पैसे की मजबूती दर्शाते हुए 96.35 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के दौरान भारतीय मुद्रा ने 96.27 रुपये के उच्च स्तर और 96.41 रुपये के निचले स्तर को छुआ। अंततः, घरेलू इक्विटी बाजार यानी दलाल स्ट्रीट पर सेंसेक्स में आई लगभग 800 अंकों की भारी उछाल और निफ्टी के 24,200 के करीब पहुंचने से रुपये को तगड़ा समर्थन मिला, जिसके कारण यह 96.30 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा।
हालांकि, रुपये की इस बढ़त पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के दो प्रमुख कारकों ने दबाव भी बनाया, जिससे इसकी तेजी सीमित रह गई। पहला कारण पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है, जिसके चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। दूसरा बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय पूंजी बाजार से 34.27 करोड़ डॉलर मूल्य की शुद्ध बिकवाली करना रहा। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रा बाजार में समय पर किए गए हस्तक्षेप और हाल ही में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में हुई 96.4 करोड़ डॉलर की आंशिक बढ़ोतरी ने रुपये को गिरावट से बचाए रखा।