संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन सोमवार को लोकसभा में जबरदस्त राजनीतिक घमासान देखने को मिला। अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में कथित चढ़ावा और दान की चोरी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) सहित विपक्षी दलों ने निचले सदन में तीखा विरोध प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की और इस संवेदनशील विषय पर तत्काल चर्चा कराने की मांग रखी। भारी हंगामे और शोर-शराबे के कारण अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
सत्र की शुरुआत से पूर्व समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अहंकार में काम कर रही है और जनहित के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है। अखिलेश यादव ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि अतीत में विदेशी आक्रांताओं ने मंदिरों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाया था, जबकि आज सत्ता पक्ष जन आस्था के केंद्रों और युवाओं के भविष्य दोनों के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उन्होंने नीट (NEET) परीक्षा धांधली और युवाओं के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
वहीं फैजाबाद (अयोध्या) से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने राम मंदिर दान गबन मामले को करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर गहरा आघात बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के जिम्मेदार लोग श्रद्धालुओं के चढ़ावे की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रोजाना लाखों लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, तब इस तरह के वित्तीय घपले होना बेहद गंभीर विषय है। सपा सांसद ने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस मुद्दे को संसद के पटल पर पूरी मजबूती से उठाएगा और सरकार को जवाब देने के लिए बाध्य करेगा।