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'2 महीने 17 दिन अंधेरे कमरे में रही', पंजाबी सिंगर सुनंदा शर्मा ने बयां किया डिप्रेशन का दर्द

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Posted On:Wednesday, July 15, 2026

लोकप्रिय पंजाबी सिंगर और एक्ट्रेस सुनंदा शर्मा ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन और अंधकारमय दौर को लेकर खुलकर बात की है। शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान सुनंदा ने खुलासा किया कि वह एक समय बेहद गंभीर डिप्रेशन (अवसाद) से जूझ रही थीं और उन्होंने खुद को "2 महीने और 17 दिन" के लिए पूरी तरह से एक अंधेरे कमरे में कैद कर लिया था। इस दौरान उन्होंने अपने परिवार सहित किसी भी व्यक्ति से कोई बातचीत नहीं की।
इस दर्दनाक अनुभव ने न केवल उनकी मानसिक सेहत बल्कि प्यार, शादी, रिश्तों और पैसों को लेकर उनके पूरे नजरिए को बदल कर रख दिया है।
"अकेलेपन और हकीकत से डर लगने लगा था"
अपनी आपबीती साझा करते हुए सुनंदा ने बताया कि हालांकि वह उस दौर से आगे बढ़ चुकी हैं, लेकिन आज भी डिप्रेशन का एक हिस्सा उनके भीतर कहीं न कहीं मौजूद है।
सुनंदा ने कहा: "मैं कुछ साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सकों) के पास भी गई, लेकिन वह मेरे बस की बात नहीं थी। मुझे समझ नहीं आता था कि वे मेरे दर्द को कैसे समझ सकते हैं और उसे कैसे कम कर सकते हैं। मैं डरी हुई थी और अकेली थी। मेरी हकीकत ही मुझे अंदर ही अंदर खाने लगी थी। मैंने लोगों से बात करना बंद कर दिया था।"
सुनंदा ने यह भी स्वीकार किया कि इस डिप्रेशन के असर के कारण आज भी जब कोई उन्हें प्यार दिखाता है, तो वह डर जाती हैं और रोने लगती हैं। उन्होंने बताया कि इस दौर में वे असुरक्षा की भावना से इस कदर घिर गई थीं कि उन्होंने लोगों को महंगे तोहफे देने शुरू कर दिए ताकि कोई उन्हें छोड़कर न जाए। उन्हें लगने लगा था कि लोग केवल पैसों के लिए ही साथ रह सकते हैं।
8 साल के रिलेशनशिप के बाद शादी पर बदली राय
सुनंदा ने बताया कि उनके 8 साल लंबे चले एक रिलेशनशिप ने शादी को लेकर उनके विचारों को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने साफ किया कि ऐसा नहीं है कि उन्हें प्यार पर भरोसा नहीं है—वे आज भी प्यार में होना पसंद करती हैं—लेकिन फिलहाल वे शादी के बंधन में बंधने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं।

  • काम और आर्थिक आजादी पर फोकस: सुनंदा ने कहा, "शायद भविष्य में मुझमें फिर से कोई बदलाव आए और चीजें नया मोड़ लें, लेकिन फिलहाल मेरा पूरा ध्यान मेरे संगीत, मेरे काम और अपने पैसे कमाने पर है।"
  • सच्चे रिश्तों की अहमियत: रोमांटिक पार्टनरशिप के बजाय सुनंदा अब जीवन में गिने-चुने लेकिन गहरे रिश्तों को अहमियत देती हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में एक सच्चे इंसान को कमाना (पाना) बहुत मुश्किल है, लेकिन उन्होंने अपनी जिंदगी में ऐसे 3-4 बेहद खास लोग कमाए हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
मुंबई की मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. रिम्पा सरकार के अनुसार, डिप्रेशन का ऐसा गंभीर दौर व्यक्ति के मन पर लंबे समय तक रहने वाले भावनात्मक जख्म छोड़ जाता है।
  • गंभीर डिप्रेशन के लक्षण: लंबे समय तक सामाजिक दूरी बना लेना, खुद को अकेला कर लेना, रोजमर्रा की जिंदगी में दिलचस्पी खो देना, लगातार उदासी और निराशा की भावना गंभीर डिप्रेशन के मुख्य चेतावनी संकेत (Warning Signs) हैं।
  • इमोशनल ट्रॉमा का असर: पुराना भावनात्मक सदमा (Trauma) इंसान के दिमाग में यह बात बैठा देता है कि किसी के करीब जाने या लगाव होने से सिर्फ दर्द ही मिलता है। यही वजह है कि ठीक होने के बाद भी लोग दूसरों पर आसानी से भरोसा नहीं कर पाते या किसी का प्यार स्वीकार करने में असहज महसूस करते हैं।


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