केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) से जुड़ी खबरें नई उम्मीदें लेकर आई हैं। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित पैनल ने अपना काम तेज कर दिया है। सरकार की योजना के अनुसार, इस नए वेतन ढांचे को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जा सकता है। वर्तमान में कर्मचारी यूनियनों और विशेषज्ञों के बीच सबसे बड़ी चर्चा 'फिटमेंट फैक्टर' और न्यूनतम बेसिक सैलरी को लेकर है।
अनुमानों के मुताबिक, यदि आयोग 2.86 गुना फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला अपनाता है, तो कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़कर 51,480 रुपये तक पहुंच सकती है। यह बदलाव न केवल निचले स्तर के कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा, बल्कि इसका आनुपातिक लाभ उच्च स्तर के अधिकारियों (Level 18 तक) को भी मिलेगा। पैनल वर्तमान में मार्च-अप्रैल 2026 के दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों से मिले फीडबैक का विश्लेषण कर रहा है, ताकि एक संतुलित पे-मैट्रिक्स तैयार किया जा सके।
सैलरी के अलावा, पेंशनभोगियों के लिए भी यह आयोग बड़ी सौगात ला सकता है। नए पे-स्ट्रक्चर से पेंशन और ग्रेच्युटी की गणना में बड़ा उछाल आएगा। हालांकि, आयोग की अंतिम रिपोर्ट आने में अभी समय है, लेकिन 17 जनवरी 2025 को जारी अधिसूचना के बाद से ही प्रशासनिक प्रक्रियाएं पटरी पर हैं। जस्टिस देसाई के नेतृत्व वाली यह टीम पुलक घोष और पंकज जैन जैसे विशेषज्ञों के साथ मिलकर ऐसा फॉर्मूला बनाने की कोशिश कर रही है, जो महंगाई के इस दौर में सरकारी अमले की क्रय शक्ति को बनाए रखने में सक्षम हो