काहिरा/ज्यूरिख: फीफा विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में गत चैंपियन अर्जेंटीना के हाथों मिली 3-2 की सनसनीखेज हार के बाद मिस्र के खेल जगत और कूटनीतिक गलियारों में कड़ा रोष व्याप्त हो गया है। इस विखंडनकारी मैच के लॉजिस्टिक्स और रेफरी के फैसलों पर वैश्विक स्तर पर कड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मुकाबले में 79वें मिनट तक 2-0 की मजबूत सांख्यिकी बढ़त बनाने के बावजूद मिस्र की टीम को अंतिम 11 मिनटों में रेफरी के कुछ बेहद विवादित और विरोधाभासी नियमों के कारण विश्व कप से बाहर होना पड़ा। विवाद का मुख्य विलेख मैच के 62वें मिनट में मुस्तफा ज़िको द्वारा किए गए वैध गोल को वीएआर (VAR) समीक्षा के नाम पर रद्द करना और अंतिम क्षणों में स्टार खिलाड़ी मोहम्मद सलाह को पेनाल्टी बॉक्स में गिराए जाने के बाद भी विधिक पेनाल्टी न देना रहा, जिसने खेल का पासा कड़ाई से पलट दिया।
इस घटनाक्रम पर मिस्र के खेल मंत्री गोहर नबील और मुख्य कोच होसम हसन ने आधिकारिक विलेख जारी करते हुए इसे मिस्र के साथ सरेआम कूटनीतिक अन्याय बताया है। कोच ने आरोप लगाया कि मैच से पहले फ्रांसीसी रेफरी फ्रांस्वा लेटेक्सिएर की नियुक्ति पर अर्जेंटीना द्वारा बनाए गए अनुचित मनोवैज्ञानिक दबाव का असर उनके पक्षपातपूर्ण फैसलों में साफ दिखा। मिस्र फुटबॉल संघ के अध्यक्ष हानी अबू रीदा ने बिना सांख्यिकी समय गंवाए फीफा (FIFA) को एक कड़ा औपचारिक शिकायत पत्र भेजकर मैच अधिकारियों के दोहरे मानदंडों की तत्काल विधिक जांच कराने की मांग की है।
इस विवाद पर दुनिया भर की खेल हस्तियों ने कड़ा रुख अपनाया है। पुर्तगाली फुटबॉल मैनेजर जोस मोरिन्हो ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अब खेल नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी फिल्म बन चुका है जिसकी पटकथा खिलाड़ियों के मैदान पर उतरने से पहले ही लिखी जा चुकी थी। वहीं, पूर्व शतरंज चैंपियन गैरी कास्पारोव और वेस्ट इंडीज के क्रिकेटर कार्लोस ब्राथवेट ने भी सोशल मीडिया पर फीफा के सुरक्षा कवच और पारदर्शिता की आलोचना करते हुए इसे वैश्विक मंच पर बड़ी लूट करार दिया। ग्रुप-जी के इस ऐतिहासिक सफर में मिस्र पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचा था, लेकिन इन कड़े विवादों ने उनके शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और ऐतिहासिक प्रदर्शन को निराशा में बदल दिया।