प्रकृति में ऐसे कई जीव-जंतु हैं जिनके जीने और वंश बढ़ाने का तरीका इंसानों को हैरान कर देता है। आमतौर पर पक्षी अंडे देने के लिए पेड़ों या सुरक्षित जगहों पर घोंसला बनाते हैं और हफ्तों तक उन अंडों पर बैठकर उन्हें अपनी शारीरिक गर्मी (Incubation) देते हैं। लेकिन इंडोनेशिया में एक ऐसा दुर्लभ पक्षी पाया जाता है जो घोंसला बनाने की बजाय सक्रिय ज्वालामुखियों (Active Volcanoes) के पास सुलगती हुई मिट्टी में अपने अंडे गाड़ देता है। इस अनोखे पक्षी का नाम है मालेओ (Maleo)।
ज्वालामुखी बनता है बच्चों का 'नर्सरी'
इंडोनेशिया के सुलावेसी (Sulawesi) द्वीप पर पाया जाने वाला मालेओ पक्षी अंडों को सेने के लिए प्रकृति की भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) का इस्तेमाल करता है। मालेओ के जोड़े जंगलों से निकलकर विशेष रूप से उन जगहों पर जाते हैं जहाँ ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण जमीन अंदर से गर्म होती है।
वहाँ पहुँचकर ये पक्षी जमीन में लगभग 3 फीट (1 मीटर) गहरा गड्ढा खोदते हैं। मादा पक्षी उस गड्ढे में एक बड़ा अंडा देती है और फिर ये जोड़ा बड़ी सावधानी से उस गड्ढे को मिट्टी से वापस भर देता है। इसके बाद वे वहाँ से चले जाते हैं। ज्वालामुखी की अंदरूनी गर्मी उस अंडे को बिल्कुल सही तापमान देती है, जिससे उसके अंदर बच्चा विकसित होता है।
मुर्गी के अंडे से 5 गुना भारी होता है अंडा
मालेओ पक्षी का शरीर भले ही एक मध्यम आकार की मुर्गी जैसा होता है, लेकिन इसके अंडे का आकार इसके शरीर के अनुपात में बहुत बड़ा होता है। इसका एक अंडा लगभग 240 से 270 ग्राम का होता है, जो सामान्य मुर्गी के अंडे से करीब 5 गुना ज्यादा भारी होता है। इस अंडे के अंदर पोषक तत्वों (Yolk) की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो बच्चे को बिना माता-पिता की देखभाल के अंदर ही पूरा पोषण देती है।
पैदा होते ही आत्मनिर्भर: न माता-पिता, न कोई सहारा
इस पक्षी की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसका बच्चा पैदा होते ही पूरी तरह आत्मनिर्भर होता है:
- जब अंडा पूरी तरह विकसित हो जाता है, तो बच्चा जमीन के अंदर ही अंडे को तोड़ता है।
- वह अकेले ही लगभग 3 फीट गहरी मिट्टी को खोदते हुए सतह पर ऊपर आता है। ऊपर उसका स्वागत करने के लिए कोई माता-पिता मौजूद नहीं होते।
- बाहर आने के कुछ ही घंटों के भीतर यह बच्चा न सिर्फ चल और दौड़ सकता है, बल्कि उड़ने में भी सक्षम हो जाता है। वन्यजीव वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दुनिया के सबसे आत्मनिर्भर नवजात पक्षियों में से एक है।
खतरे में है मालेओ का अस्तित्व
हजारों सालों से चली आ रही यह अनोखी रणनीति अब इस पक्षी के लिए मुसीबत बन गई है। मालेओ पक्षी केवल कुछ ही सीमित ज्वालामुखीय क्षेत्रों में अंडे दे सकते हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई, इंसानी दखल और उनके कीमती अंडों की चोरी (लोग इन्हें खाने या महंगे दामों पर बेचने के लिए चुरा लेते हैं) के कारण इनकी आबादी में भारी गिरावट आई है।
इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) ने मालेओ पक्षी को 'लुप्तप्राय' (Endangered) श्रेणी में रखा है। यदि इनके प्राकृतिक ठिकानों और अंडों को नहीं बचाया गया, तो प्रकृति का यह अनोखा इंजीनियर हमेशा के लिए इस धरती से गायब हो जाएगा।