ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को दी गई अंतिम विदाई, अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच बढ़ी मध्य-पूर्व की चिंता
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को युद्ध की शुरुआत में हुए हमलों में मारे जाने के कई महीनों बाद उनके गृहनगर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ दफनाया गया। सार्वजनिक शोक की अवधि पूरी होने के बाद हुए अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान अमेरिका और इजराइल के खिलाफ नारे लगाए गए और समर्थकों ने उन्हें ईरान की संप्रभुता और प्रतिरोध का प्रतीक बताया।
बताया गया कि युद्ध के दौरान अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में उनकी मृत्यु हुई थी। लगभग 37 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व करने वाले खामेनेई देश के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उनके निधन के बाद पूरे देश में कई दिनों तक शोक मनाया गया। मशहद में दफनाए जाने वाले वह ईरान के दूसरे प्रमुख शासक हैं। इससे पहले वर्ष 1747 में नादेर शाह को भी इसी शहर में दफनाया गया था।
अंतिम संस्कार के दौरान ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। सड़कों पर सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई, जबकि कुछ क्षेत्रों में हवाई यातायात और सामान्य गतिविधियों पर भी अस्थायी रोक लगाई गई। हजारों लोगों ने अंतिम यात्रा में शामिल होकर अपने नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसी बीच मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ गया। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाने का दावा किया। बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे देशों में मिसाइल हमलों और सायरन बजने की खबरों ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी। कई स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
ईरान के अधिकारियों ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में देश के महत्वपूर्ण सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास का इलाका भी शामिल था। वहीं अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि उसने ईरान में लगभग 90 सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की। इन हमलों का उद्देश्य मिसाइल लॉन्चर, सैन्य ढांचे और अन्य रणनीतिक परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचाना बताया गया।
ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दो दिनों तक चले हवाई हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 से अधिक लोग घायल हुए। अधिकांश मृतक सुरक्षा बलों से जुड़े बताए गए हैं। दूसरी ओर कुवैत और बहरीन ने दावा किया कि उन्होंने अपनी ओर आने वाली कई बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन को सफलतापूर्वक मार गिराया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद क्षेत्र में युद्धविराम को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों को युद्धविराम के लिए गंभीर खतरा बताया और चेतावनी दी कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो संघर्ष और व्यापक हो सकता है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
मध्य-पूर्व में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और जवाबी हमलों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।