काफी समय से सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जिस खरीदार की तलाश कर रहे थे, वह प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचती दिख रही है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, कनाडाई निवेश फर्म फेयरफैक्स फाइनेंशियल्स होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) द्वारा अपना ऑफर बेहतर करने के बाद सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के लिए उसे पसंदीदा खरीदार के रूप में चुन लिया है।
यह महत्वपूर्ण फैसला वित्त मंत्रालय में हुई उच्च स्तरीय बैठकों के बाद लिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय मूल के कनाडाई अरबपति प्रेम वत्सा की कंपनी फेयरफैक्स अब ₹81 प्रति शेयर का ऑफर दे रही है, जो पिछले साल (और इस साल मार्च में) दिए गए ₹75 के ऑफर से करीब 8% अधिक है। इस संशोधित कीमत पर यदि सौदा पक्का होता है, तो यह भारतीय बैंकिंग इतिहास के सबसे बड़े घटनाक्रमों में से एक होगा।
डील का गणित और सरकारी खजाने को फायदा
इस विनिवेश (Disinvestment) प्रक्रिया के तहत सरकार और LIC अपनी कुल 60.72% हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं:
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सरकार की हिस्सेदारी: सरकार बैंक में अपनी 45.48% हिस्सेदारी में से 30.48% हिस्सेदारी बेचेगी, जिससे सरकारी खजाने में लगभग ₹26,620 करोड़ आएंगे।
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LIC की हिस्सेदारी: LIC अपनी 49.24% हिस्सेदारी में से 30.24% हिस्सेदारी बेचेगी, जिससे उसे लगभग ₹26,440 करोड़ मिलेंगे।
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कुल डील का साइज: दोनों की हिस्सेदारी मिलाकर इस सौदे का कुल मूल्य लगभग ₹53,000 करोड़ ($5.5 बिलियन) हो जाएगा।
ऐतिहासिक विदेशी निवेश: यदि यह डील पूरी हो जाती है, तो यह किसी भी भारतीय बैंक में अब तक का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) होगा। इसके साथ ही फेयरफैक्स को नियामक नियमों के अनुसार सार्वजनिक शेयरधारकों के लिए एक 'ओपन ऑफर' (Open Offer) भी लाना होगा।
इन महत्वपूर्ण मंजूरियों की होगी जरूरत
डील को अंतिम रूप देने से पहले अभी कई कानूनी और नियामक प्रक्रियाओं को पार करना होगा:
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केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी: वित्त मंत्रालय और मंत्रियों के अधिकार प्राप्त समूह (Empowered Group of Ministers) की समीक्षा के बाद प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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RBI का 'फिट एंड प्रॉपर' टेस्ट: सफल बोलीदाता (Fairfax) को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े 'फिट एंड प्रॉपर' (Fit & Proper) मानकों पर खरा उतरना होगा。
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CSB बैंक के साथ विलय का नियम: फेयरफैक्स के पास वर्तमान में केरल आधारित CSB बैंक में 40% हिस्सेदारी है। चूँकि RBI एक ही प्रमोटर को दो बैंकिंग लाइसेंस रखने की अनुमति नहीं देता, इसलिए फेयरफैक्स को या तो CSB बैंक से बाहर निकलना होगा या समय सीमा के भीतर इन दोनों बैंकों का आपस में विलय (Merge) करना होगा।
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अन्य मंजूरियां: इसके अलावा भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य वैधानिक संस्थाओं से क्लीयरेंस लेना अनिवार्य होगा।