भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ समय से जारी उतार-चढ़ाव और उतार-चढ़ाव भरे दौर के बावजूद, दीर्घकालिक निवेश के मोर्चे पर म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बेहद शानदार आंकड़े सामने आए हैं। पिछले 5 वर्षों के प्रदर्शन की समीक्षा करें तो भारत में संचालित कुल 310 इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में से 101 फंड्स ने अपने निवेशकों की पूंजी को दोगुना या उससे भी अधिक करने में सफलता हासिल की है। इतना ही नहीं, बाजार में कुछ ऐसे असाधारण प्रदर्शन करने वाले फंड्स भी रहे हैं जिन्होंने महज 3 साल के भीतर ही निवेशकों की जमा रकम को दोगुना से अधिक कर दिया। हालांकि, इस ऐतिहासिक वेल्थ क्रिएशन (सम्पत्ति निर्माण) के बीच वित्तीय विशेषज्ञों ने आम निवेशकों को केवल पिछले प्रदर्शन के आधार पर आंख मूंदकर बड़ा दांव न लगाने की सख्त चेतावनी भी दी है।
फंड्स के प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले 5 सालों में 'आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड' 188 प्रतिशत के बंपर रिटर्न के साथ चार्ट में सबसे ऊपर रहा। इसके ठीक बाद एसबीआई पीएसयू फंड और एलआईसी एमएफ इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड ने भी लगभग 183-183 फीसदी का धमाकेदार मुनाफा दर्ज कराया। 3 साल की अल्पावधि की बात करें तो 'एचडीएफसी डिफेंस फंड' 174.11% रिटर्न के साथ सबसे आगे रहा, जिसने निवेशकों के 1 लाख रुपये को महज तीन साल में 2.74 लाख रुपये में तब्दील कर दिया। इन सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स की इस अभूतपूर्व कामयाबी के पीछे केंद्र सरकार का बढ़ता पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure), रक्षा बजट में रिकॉर्ड आवंटन और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास से जुड़ी नीतियां मुख्य कारक रहीं, जिन्होंने संबंधित क्षेत्र की कंपनियों की कमाई को बूस्ट दिया।
बाजार विशेषज्ञों और आनंद राठी वेल्थ के शीर्ष प्रबंधन का मानना है कि सेक्टोरल निवेश हमेशा एक चक्र (Sectoral Cycle) के तहत काम करता है, जहाँ तेजी के बाद ठहराव आना निश्चित है। जिन थीम्स ने पिछले पांच वर्षों में शीर्ष स्थान हासिल किया, उनमें से कई का हालिया दो वर्षों का रिटर्न काफी धीमा रहा है। ऐसे में खुदरा निवेशकों के लिए बाजार के जोखिम को कम करने के लिए फ्लेक्सी कैप, मल्टी कैप और लार्ज एंड मिडकैप जैसे डायवर्सिफाइड (विविधतापूर्ण) इक्विटी फंड्स में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करना एक अधिक सुरक्षित और समझदारी भरा विकल्प साबित हो सकता है।