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होर्मुज स्ट्रेट संकट: ट्रंप का यू-टर्न, 20% टैक्स की जगह खाड़ी देशों से होगी 'मेगा इन्वेस्टमेंट' डील

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Posted On:Wednesday, July 15, 2026

सिर्फ 24 घंटे में बदला फैसला: टैक्स का प्रस्ताव वापस

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ ट्रंप की आर्थिक रणनीति में देखने को मिला। इससे पहले, सोमवार (13 जुलाई 2026) को ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका चूंकि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को सुरक्षा दे रहा है, इसलिए वह वहां से गुजरने वाले सभी कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत 'यूनाइटेड स्टेट्स रीइंबर्समेंट फीस' (सुरक्षा टैक्स) लगाएगा।

इस फैसले का अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और वैश्विक शिपिंग कंपनियों (जैसे हैपाग-लॉयड) ने कड़ा विरोध किया, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किसी अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर ऐसा टैक्स नहीं वसूला जा सकता।

खाड़ी देशों से बातचीत के बाद नया प्लान:

मंगलवार (14 जुलाई 2026) को खाड़ी देशों (Gulf States) के नेताओं के साथ हुई उच्चस्तरीय बातचीत के बाद ट्रंप ने इस 20% टैक्स के प्रस्ताव को पूरी तरह वापस ले लिया।

ट्रंप का नया दांव: टैक्स वसूलने के बजाय, अब अमेरिका खाड़ी देशों के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार और निवेश समझौते (Trade & Investment Deals) करेगा। ट्रंप का दावा है कि ये निवेश ऐतिहासिक स्तर के होंगे, जिसके जरिए अमेरिका में बड़े पैमाने पर नए कारखाने, मैन्युफैक्चरिंग प्लांट और उपकरण आएंगे, जिससे लाखों उच्च वेतन वाली नौकरियां पैदा होंगी।

परमाणु हथियारों और प्रदर्शनकारियों पर कड़ा संदेश

अपने बयान के अंत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि वह दिन अब लद चुके हैं जब ईरान लाखों लोगों और अपने ही 52,000 प्रदर्शनकारियों की आवाज को हिंसक तरीके से दबा देता था। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में दोहराया कि "ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होगा"

होर्मुज स्ट्रेट संकट का फ्लैशबैक (Timeline)

तारीख / समय घटनाक्रम और फैसले
13 जुलाई 2026 ट्रंप ने खुद को 'गार्जियन ऑफ होर्मुज' घोषित करते हुए सभी जहाजों पर 20% सुरक्षा टैक्स लगाने की बात कही।
14 जुलाई 2026 (शाम 4 बजे से) अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों और जहाजों के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया।
14 जुलाई 2026 (रात) वैश्विक विरोध और खाड़ी देशों के अनुरोध के बाद ट्रंप ने 20% टैक्स हटाकर उसकी जगह 'मेगा इन्वेस्टमेंट डील' का प्रस्ताव रखा।

इस नाकेबंदी और राजनयिक टकराव के कारण दुनिया के इस सबसे व्यस्त तेल मार्ग (जहां से वैश्विक तेल का 20% हिस्सा गुजरता है) में जहाजों की आवाजाही 50% से अधिक घट गई है, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।


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