नयी दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय ऑटोमोटिव कंपोनेंट उद्योग से अपनी सीमाओं का विस्तार करने और वैश्विक बाजारों में मजबूत पैठ बनाने का आह्वान किया है। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के 66वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय कंपनियों को अब केवल घरेलू स्तर तक सीमित रहने के बजाय विकसित देशों में भी अपनी निर्माण इकाइयां (मैन्युफैक्चरिंग प्लांट) स्थापित करनी चाहिए।
वाणिज्य मंत्री ने बताया कि भारत का ऑटो कंपोनेंट व्यापार वर्तमान में लगभग 50 अरब डॉलर का है, जिसमें आयात और निर्यात लगभग समान स्थिति में हैं। उन्होंने उद्योगपतियों को सलाह दी कि वे मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) में ऊपर उठें और अपनी आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाएं। उन्होंने रेखांकित किया कि विगत वर्षों में भारत सरकार द्वारा 38 विकसित देशों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया गया है, जो कुल 60 लाख करोड़ डॉलर से अधिक की जीडीपी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये समझौते भारतीय निर्माताओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए और आकर्षक अवसर प्रदान करते हैं।
श्री गोयल ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय उद्योग पूरी दुनिया में प्रतिस्पर्धी दरों पर उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद बनाने में सक्षम है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय निवेश बढ़ाने और शून्य-शुल्क बाजार पहुंच का लाभ उठाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने उद्योग से आग्रह किया कि वे अपनी रणनीतियों को आधुनिक वैश्विक मांगों के अनुसार ढालें ताकि भारत को ऑटोमोटिव विनिर्माण का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय केंद्र बनाया जा सके।