हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक 96 किलोमीटर लंबे शिमला-कालका रेल मार्ग को बुरी तरह प्रभावित किया है। सोलन जिले के कोटी और गुम्मन रेलवे स्टेशनों के बीच पुल संख्या 57 के पास पहाड़ी खिसकने और पटरियों के नीचे की मिट्टी बह जाने से रेल की पटरी हवा में लटक गई है। सुरक्षा के मद्देनजर उत्तर रेलवे ने इस मार्ग पर चलने वाली सभी 10 'टॉय ट्रेन' सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। गनीमत यह रही कि ट्रैक क्षतिग्रस्त होने से पहले करीब 391 यात्रियों और 40 रेल कर्मचारियों को सुरक्षित कालका पहुंचा दिया गया था।
शिमला रेलवे स्टेशन के अधीक्षक के अनुसार, रेलवे इंजीनियरों द्वारा क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण करने और पटरी को पूरी तरह सुरक्षित घोषित करने के बाद ही परिचालन दोबारा शुरू किया जाएगा। इस अचानक रद्दीकरण से वीकेंड पर घूमने आए सैकड़ों पर्यटकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और आमतौर पर गुलजार रहने वाला शिमला स्टेशन पूरी तरह वीरान नजर आया। 102 सुरंगों और 800 पुलों वाले इस इंजीनियरिंग चमत्कार पर ट्रेन सेवा ठप होने से राज्य के पर्यटन उद्योग को बड़ा झटका लगा है।
उत्तर प्रदेश और हिमाचल के कई हिस्सों में कुदरत का कहर जारी है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र के मुताबिक, बारिश और भूस्खलन के कारण मंडी, कुल्लू और कांगड़ा सहित विभिन्न जिलों में कुल 64 सड़कें बंद हो चुकी हैं। इसके अलावा 225 बिजली ट्रांसफॉर्मर ठप पड़े हैं और 9 पेयजल योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग (IMD) ने आगामी चार दिनों के लिए भारी बारिश का 'येलो अलर्ट' जारी किया है। 30 जून से अब तक मानसून से जुड़ी दुर्घटनाओं में राज्य को 1,184 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हो चुका है।